कम्प्यूटर के प्रकार – Types of Computer in Hindi

दोस्तों क्या आप भी कंप्यूटर के बारे में जानना चाहते हैं? कंप्यूटर क्या है? कंप्यूटर के प्रकार? कंप्यूटर एक electronic डिवाइस है| आज के समय ऐसा कोई व्यक्ति नही हिया जिसने कंप्यूटर के बारे मे सुना नही होगा ओर इसका इस्तेमाल नही किया होगा| कंप्यूटर software ओर hardware का समूह है| यह इन दोनों से मिलकर बना है| पहले के समय इसका उपयोग गणना करने के लिया किया जाता था| कंप्यूटर डाटा का समूह है यह डाटा स्टोरेज डिवाइस है| कंप्यूटर का शब्द Latin शब्द “computer” से लिया गया है| कंप्यूटर का काम input, processing एंड output| पहला काम इसमें डाटा को input करना इसका दूसरा काम दिए गए डाटा को process करना ओर तीसरा काम process किया गया डाटा को output करना मतलब उस डाटा को स्क्रीन के उपर दिखाना|

आज के समय कंप्यूटर एक ऐसा डिवाइस बन गया है जिसका परयोग हर जगह किया जाता है जैसे कि स्कूल, घर, ऑफिस आदि मे इसका बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है|

Table of Contents

कंप्यूटर के प्रकार

कंप्यूटर तीन प्रकार के होते है|

  • कार्यप्रणाली के आधार पर (Based on Mechanism)
  • उद्देश्य के आधार पर (Based on Purpose)
  • आकार के आधार पर (Based on Size)

कार्यप्रणाली के आधार पर (Based on Mechanism) : कार्यप्रणाली के आधार पर यह तीन प्रकार के होते है|

  • Analog Computers
  • Digital Computers
  • Hybrid Computers

Analog Computers

nalog कंप्यूटर का इस्तेमाल भौतिक मात्राओ को मांपने के लिए किया जाता है| जैसे कि तापमान, लम्बाई, ताप, उचाई तथा उचाई आदि को मापने के लिए किया जाता है| analog ग्रीक शब्द एना-लॉगॉन से लिया गया है, जिसका अर्थ है “अनुपात के अनुसार”| पहला जो analog कम्प्युटर था उसका नाम ‘Antikythera Mechanism’ था|यह पहले ancient Greece में 150-100 BC के बीच इस्तेमाल हुआ था| पर इसके सबसे ज्यादा इस्तेमाल 1950 से लेकर 1960 के बीच में हुआ है| इस कंप्यूटर का इस्तेमाल विज्ञान ओर इंजीनियरिंग के क्षेत्र मे किया जाता है| Analog कंप्यूटर मे डाटा स्टोर नही होता क्योकि इस कंप्यूटर मे मेमोरी बहुत कम होती है| analog कंप्यूटर का कम analog डाटा प्रापत करना ओर तुरंत ही आपको result देता है| उदाहरण के तोर पर थर्मामीटर, थर्मामीटर का इस्तेमाल तापमान को मापने के लिए किया जाता है| जब भी आप इसका इस्तेमाल करते है यह आपको result देता है| अगली बार जब आप थर्मामीटर का इस्तेमाल करते है वह आपको नया डाटा देता है ओर पुराना डाटा lost हो जाता है| यह हर बार शुरू से तापमान मापता है|

analog कंप्यूटर सिर्फ analog डाटा को use करने के लिए बनाया गया है| यह सिर्फ analog डाटा के उपर काम करता है| analog कंप्यूटर की कीमत बहुत कम होती है| यह कंप्यूटर घरो ओर ऑफिस मे इसका इस्तेमाल नही होता|  आज के समय analog कंप्यूटर की जगह डिजिटल कम्प्यूटर्स ने ले ली है|

Analog कंप्यूटर के उदाहरण :

  • Speedometer
  • Analog Clock
  • Seismometer
  • Tide Predictors
  • Thermometer

Speedometer

Vehicle की गति को मापने के लिए जिसका प्रयोग होता है उससे speedometer कहते है| यह भी analog कंप्यूटर है| bike cars, बस ओर भी बहुत वाहन है जिसमे इसका प्रयोग किया जाता है| यह कंप्यूटर गति को मापता है| आप जैसे जैसे व्हीकल की गति को तेज करते है यह आपके साहमने result देता है|

Analog Clock

घरो, ऑफिस ओर भी बहुत ऐसी जगह है जहा इसका इस्तेमाल बहुत होता है| यह वह घड़ियों होती है| जो सुइयों की मदद से समय बताती है| उदाहरण के तोर पर दीवार पर लगी गयी घड़ी| जो भी सुइयों वाला clock है| यह बड़े से बड़े आकर मे भी आती है ओर छोटे से छोटे आकर मे भी होती है|

Seismometer

इसका प्रयोग भूकंप की तीव्रता को मापने के लिए किया जाता है| यह डिवाइस धरती मे होने वाले हिल जुल को मापने के लिए किया जाता है| चाहे वह भूकंप के कारण से ज्वालामुखी के फटने से या धरती मे होने होने वाली हिल जुल किसी धमाके की वजह से होने वाली किसी भी तरह की हिल जुल हो उन सभी को मापने के लिए इस analog कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाता है| यह डिवाइस कंपन को रिकार्ड करता है जो धरती के हिलने की वजह से पैदा होती है|

Tide Predictors

इस डिवाइस का प्रयोग समुंदर के ज्वार को मापने के लिए किया जाता है| यह डिवाइस सूर्य ओर चाँद से ही बता देता है की आने वाला ज्वार कितने बड़े हो सकते है| समुन्द्र में आने वाले ज्वार धरती, सूर्य और चाँद के बीच होने वाले गुरुत्वीय खिंचाव की वजह से आते है|

Thermometer

इस डिवाइस का प्रयोग तापमान को मापने के लिए किया जाता है|

Ananlog कंप्युटर के प्रकार

  • Electronic Analog Computer
  • Mechanical Analog Computer
  • Slide Rules
  • Pneumatic Analog Computer

Electronic Analog Computer

पहला इलेक्ट्रॉनिक analog कंप्यूटर USA ने बनाया था| यह कंप्यूटर input मे इलेक्ट्रॉनिक डाटा ही लेते है| इलेक्ट्रॉनिक analog कंप्यूटर हजारों वेक्यूम ट्यूब से बने होते है| voltmeter इसकी एक अच्छी उदाहरण है| इसके अंदर input मे electricity जाती है ओर voltmeter से हमे जानकारी देता है की input मे आ रही electricity का वोल्टेज कितना है| input से आ रही electrcity, इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल होता है|

Mechanical Analog Computer

मकैनिकल analog कंप्यूटर input के तोर मे मकैनिकल डाटा लेता है| जैसे कि स्पीडोमीटर इसकी बहुत अच्छी उदाहरण है| स्पीडोमीटर की जरूरत व्हीकल की रफ्तार को मापने के लिए किया जाता है| यह ऐसा कंप्यूटर है जो हमे गाडी के पहियों के घूमने से ही हमे उस व्हीकल की रफ्तार का अंदाजा लगा कर देता है की गाडी की रफ़्तार कितनी है|

Slide Rules

यह ऐसा कंप्यूटर है जिसकी पहचान करना बहुत आसन है| यह कंप्यूटर गणितीय गणनाओं के अनुपात के लिए उपकरण है| यह कंप्यूटर एक रॉड की तरह होता है ओर इसमें इक हैशेड रॉड भी होती है| इन दोनो रॉड की मदद से आप आउटपुट मे पाते है| इस कंप्यूटर की मदद से पढाई करनी बहुत सरल है|

Pneumatic Analog Computer

इस कंप्यूटर का उपयोग कंप्रेस्ड हवा के उपयोग से पॉवर सोर्स के लिए करते है| यह एक सरल ओर साधारण analog कंप्यूटर है| इस कंप्यूटर का ज्यादातर उपयोग गैर-आवासीय भवन के क्षेत्रों मे किया जाता है|

Example of Analog Computer

  • Analogue Clock
  • ओडोमीटर एवं पेट्रोल पम्प पर लगा मीटर
  • Voltmeter
  • Frequency of Signal
  • Flight Simulators
  • Telephone Line
  • Resistance of Capacitor

Analog कंप्यूटर की विशेषताएं :

  • यह कंप्यूटर बहुत सस्ते होते है|
  • इस कंप्यूटर की डाटा स्टोरेज करने की शमता बहुत कम होती है|
  • प्रोग्रामन का ज्ञान होना कोई जरुरी नहीं होता|
  • इस कंप्यूटर का परिमाण डिजिटल कंप्यूटर के मुकाबले exact नही होता|
  • इस कंप्यूटर मे काम करने के लिए अलग अलग डाटा की जरुरत पड़ती है|

Analog कंप्यूटर के उपयोग

  • इस कंप्यूटर का उपयोग तापमान, Speed जैसी analog मात्रा की गणना करने के लिए किया जाता है|
  • Hospital मे थर्मामीटर के रूप मे उपयोग किया जाता है|
  • पेट्रोल पम्प पर लगा मीटर भी analog कंप्यूटर है|
  • वैज्ञानिक प्रयोगशाला मे सबसे अधिक मात्रा मे अन्लोग कंप्यूटर का इस्तेमाल होता है|

Digital Computers

डिजिटल कंप्यूटर वह डिजिटल सिस्टम  है जो विभिन्न तरह की कई कॉम्युटेशनल कार्य करता है। डिजिटल शब्द का मतलब है कि कंप्यूटर में जानकारी को Variables द्वारा दर्शाना, जो कि ये सीमित संख्या होती है और कंप्यूटर शब्द का मतलब है कि, संगणक या गणना करना, इसलिए आम भाषा में इसे कैलकुलेटिंग डिवाइस माना जाता है। डिजिटल कंप्यूटर में इनपुट तौर पर दिए गए डिटेल्स को डाटा कहा जाता है। डिजिटल कंप्यूटर से प्राप्त आउटपुट परिणाम को अक्सर सूचना या जानकारी कहा जाता है। डिजिटल कंप्यूटर इनपुट डाटा लेता है तब, इसे प्रोसेस करता है और इसके बाद सूचना या परिणाम को आउटपुट डिवाइस पर दिखाता है।

वर्तमान समय में कंप्यूटर की परिभाषा बदल गई है क्योंकि अब कंप्यूटर का उपयोग केवल गणना करने तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसका उपयोग वीडियो, म्यूजिक, ग्राफिक्स, इंटरनेट कामों इत्यादि बहुत से अन्य क्षेत्रों में भी बड़ी सरलता से किया रहा है। इसलिए इसे अब एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस कहते हैं।

डिजिटल कंप्यूटर का प्रयोग दुनिया भर में किया जाता है और यह एक बहुत ही पावरफुल डिवाइस है और सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है। यह एक ऐसा मशीन या उपकरण है, जो किसी भी तरह के डाटा जानकारी को मशीनी भाषा में बदलकर प्रोसेस करता है। इस उपकरण के माध्यम से हम कंप्यूटर में जब भी कुछ टाटा इनपुट करते हैं तो हमें यह कुछ सेकेंड के अंदर आउटपुट दे देता है।

डिजिटल कंप्यूटर बाइनरी नंबर सिस्टम का इस्तेमाल करता है, जिसमें 2 अंक होते हैं- 0 और 1। कंप्यूटर में डाटा की सबसे छोटी इकाई एक Bit होती है। एक बाइनरी डिजिट को एक बिट कहा जाता है। डिजिटल कंप्यूटर में सूचनाओं को बिट्स के समूहों में दर्शाया जाता है।

सबसे पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर 1940 दशक के अंत में खोजा गया था और इसका प्रयोग मुख्य रूप से संख्यात्मक गणना के लिए बनाया गया था। कंप्यूटर में जो भी शब्द लिखे होते हैं कंप्यूटर उसे बाइनरी भाषा में बदल देता है इसी कारण कंप्यूटर और मनुष्य एक दूसरे के साथ कम्युनिकेट करते हैं। डिजिटल कंप्यूटर के कुछ बेसिक उदाहरण है जैसे- पर्सनल कंप्यूटर, डेस्कटॉप, लैपटॉप, स्मार्टफोन, मोबाइल, डिजिटल वॉच और कैलकुलेटर आदि।

डिजिटल कंप्यूटर में मुख्यत

तीन भागा होते हैं जो नीचे दिए निम्न शामिल हैं-

INPUT

जब भी यूजर सामान्य रूप से डिवाइस में डाटा टाइप करता है, तो उसे इनपुट के रूप में जानते हैं।

Processing

यूजर द्वारा इनपुट किया गया डाटा परिभाषित sequance का उपयोग करके डिवाइस के आंतरिक भाग में प्रोसेस करता है।

Output

जब डाटा पूरी तरह से प्रोसेस हो जाता है तो, इनपुट के आधार पर आउटपुट परिणाम यूजर को दिखा देता है।

डिजिटल कंप्यूटर के प्रकार (Types of Digital Computer)

डिजिटल कंप्यूटर ऐसा डिवाइस है जिससे अपने अनुसार आउटपुट पाने के लिए प्रोग्राम करने की आवश्यकता होती है। यह कई अलग-अलग प्रकार के डाटा को Generate करने, स्टोर करने और प्रोसेस करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक तकनीक का प्रयोग करता है। डिवाइस के साइज और प्रकार के आधार पर, डिजिटल कंप्यूटरों को निम्न छह श्रेणियों में बांटा गया है।

  • Super computer
  • Main frame computer
  • Mini computer
  • Micro computer

डिजिटल कंप्यूटर की विशेषताएं (Features or Characterstics of Digital Computer)

Memory Capacity:- डिजिटल कंप्यूटर अत्यधिक मात्रा में डाटा या इंफॉर्मेशन मेमोरी में स्टोर कर सकते हैं और मात्र एक सेकंड के अंदर ही डाटा को पुन: रिट्रीव कर सकते हैं। मेमोरी में डाटा या सूचनाओं को किसी भी समय तक स्टोर करके रख सकते हैं तथा कभी भी पुनप्राप्त या वापस एक्सेस कर सकते हैं, जैसे हार्ड डिस्क, सॉलिड डिस्क, फ्लॉपी डिस्क, ऑप्टिकल डिस्क इत्यादि।

Very Flexible

यह कंप्यूटर बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के मल्टीटास्किंग करते हैं अर्थात एक साथ बहुत सारे कार्य प्रोसेस करते हैं जैसे डॉक्यूमेंट ड्राफ्टिंग के दौरान कोई पेज प्रिंट निकालना, म्यूजिक सुनना, चैट करना इत्यादि।इसलिए यह बहुत flexibleऔर versatile होते हैं।

Good Speed

डिजिटल कंप्यूटर काफी हाई स्पीड में कार्य करता है और सभी कार्यों या निर्देश को पल भर में उच्च गति से प्रोसेस करते हैं। यह किसी कार्य या निर्देश को सेकंड के एक भाग में ही हल कर सकता है।

Accuracy

यह डिवाइस सभी इंफॉर्मेशन डाटा को मेमोरी में स्टोर करने में सहायक होते हैं जो एक निश्चित समय में जरूरत पड़ने पर accurate डाटा प्राप्त करने में सहायता करते हैं। कंप्यूटर कोई गलती किए बिना पूरा एकदम सही-सही गणनाएं करता है इससे कोई गलती तभी आती है जब व्यक्ति द्वारा गलत इनपुट का निर्देश दिए गए हो।

Diligence

कंप्यूटर बिना थके किसी कार्य को लगातार कर सकता है। इसे कभी भी किसी भी तरह की कमजोरी अथवा थकान नहीं होती है जिससे यह किसी कार्य को बिना किसी गलती या रुकावट के लगातार कर सकता है। इसलिए कंप्यूटर की इस क्षमता के कारण मानव कार्य प्रगति में काफी विकास हुआ है।

Automatic

ये डिवाइस एक बार शुरू हो जाने के बाद स्वचालित हो जाते हैं। जब तक विशेष रूप से कोई कार्य आवश्यक होने तक उन्हें किसी हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं पड़ती।

डिजिटल कंप्यूटर के भाग( Components of Digital Computer)

आप जानते हैं, कंप्यूटर के कितने भाग  या कॉम्पोनेंट्स निमानलीखित हैं:-

Input Device

इनपुट डिवाइस खास तौर पर वह डिवाइस होते हैं, जो सिस्टम से जुड़े होते हैं जैसे कि माउस, कीबोर्ड, प्रिंटर, माइक्रोफोन और स्कैनर इत्यादि। उपयोगकर्ता इनपुट डिवाइस की मदद से सिस्टम को निर्देश देते हैं व कंप्यूटर इन निर्देशों को समझकर action लेता है। इसके बाद इस इनपुट को कंप्यूटर बाइनरी लैंग्वेज में बदलता है जो कंप्यूटर द्वारा समझने में आसानी होती है

CPU

CPU सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट है, जिसे कंप्यूटर का दिमाग माना जाता है क्योंकि यह पूरे कंप्यूटर सिस्टम को नियंत्रित करने का कार्य करता है। जब यूजर इनपुट डिवाइस के माध्यम से इनपुट करता है, तो CPU उसे प्रोसेस करता है और CPU अर्थात कंप्यूटेशनल कार्यकर्ता है इसके बाद रिजल्ट आउटपुट डिवाइस को भेजता है। CPU के अंदर कई अलग-अलग components होते हैं, जिनके कार्य की अलग-अलग जिम्मेदारियां होती हैं।

ALU

इसका पूरा नाम Arithmatic Logic Unit है, यह कंप्यूटर हार्डवेयर का एक डिजिटल सर्किट होता है। ALU मुख्य रूप से सभी अर्थमैटिक, लॉजिकल और मैथमेटिकल गणनाओं का कार्य करता है, जिसमें जोड़ना, घटाना, गुणा और भाग सम्मिलित हैं।

Control Unit

कंट्रोल यूनिट का मुख्य रूप से कार्य डाटा और निर्दोषों को कंट्रोल करने हेतु किया जाता है यह कंप्यूटर के सभी यूनिवर्स को मैनेज और कोडिनेट करता है कंट्रोल यूनिट मेमोरी से निर्देश प्राप्त करता है उसे interpret करता है, और फलस्वरूप इसके बाद इनपुट/ आउटपुट उपकरणों को निर्देश देता है।

Memory

कंप्यूटर के इस भाग का इस्तेमाल मुख्य रूप से डाटा कोड स्टोर करने के लिए करते हैं, इसे इंटरनल मेमोरी भी कहते हैं। इंटरनल मेमोरी को कई लोकेशन में बांटा गया है जो निर्देशों को स्टोर करते हैं। इनमें से प्रत्येक लोकेशन का यूनिक एड्रेस एवं समान साइज होता है। कंप्यूटर इस यूनिक एड्रेस की मदद से मेमोरी में स्टोर हुए डाटा को पूरे मेमोरी लोकेशन को सर्च किए बिना आसानी से रीड कर लेता है। जब भी कोई प्रोग्राम Run करता है तो डाटा इंटरनल मेमोरी में स्टोर होता है और Execution के अंत तक बचा रहता है।

Output Device

Output Device वह डिवाइस हैं जो कंप्यूटर से कनेक्ट होते हैं तथा इसके माध्यम से सूचनाओं को विभिन्न आउटपुट डिवाइस पर देख एवं एक्सेस कर सकते हैं। कंप्यूटर में बाइनरी डाटा को उस भाषा में परिवर्तित करते हैं जिसे कंप्यूटर उपयोगकर्ता आउटपुट डिवाइस पर समझते हैं। कंप्यूटर में आउटपुट 0और 1 के रूप में प्रदर्शित करता है जिसे कंप्यूटर की भाषा में मशीन लैंग्वेज कहते हैं। कुछ आउटपुट डिवाइस की सामान्य उदाहरण जैसे- हार्ड डिस्क, प्रोजेक्टर, मॉनिटर, प्रिंटर आदि हैं।

डिजिटल कंप्यूटर के उपयोग (Use of Digital Computer)

  • इसका इस्तेमाल गणितीय गणनाओं, कंप्यूटेशनल कार्य, स्पेसक्राफ्ट, स्वास्थ्य डोमेन, स्कूलों, कॉलेजों, बड़े या छोटे आर्गेनाइजेशन, कारखानों इत्यादि स्थानों पर किया जाता है।
  • इसका इस्तेमाल लगभग सभी जगह फोटो, म्यूजिक, वीडियो, ऍप्लिकेशन्स, डॉक्यूमेंट और अन्य फाइलों को स्टोर करने हेतु किया जाता है।
  • डिजीटल कंप्यूटर इंडस्ट्रियल तथा मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया को कंट्रोल करने के लिए प्रयोग किया जा रहा है।
  • कारखानों में, ऑटोमेटिक मशीनों को चलाने हेतु एक ही समय पर कई कामों को किया जा सकता है।
  • यह बड़ी मात्रा में डाटा स्टोर कर सकता है और डाटा को तीव्र गति से पुन: प्राप्त किया जा सकता है।
  • उपयोगकर्ता बिना किसी हस्तक्षेप के मल्टीटास्किंग कार्य कर सकते हैं।
  • इसकी प्रोसेस करने की क्षमता गति बहुत अधिक और सेकेंड के अंदर ही टास्क परफॉर्म करता है।

Hybrid Computer

हाइब्रिड कंप्यूटर विभिन्न प्रकार के कंप्यूटर होते हैं जिनमें डिजिटल और एनालॉग कंप्यूटर दोनों की विशेषताएं होती है। इस कंप्यूटर को डिजाइन करने का मुख्य उद्देश्य बहुत ही जटिल गणना करना है। तार्किक और तकनीकी गणनाओं को हल करने के साथ-साथ विभेदक समीकरणों की बहुत अधिक प्रोसेसिंग की पेशकश करने के लिए बड़े पैमाने के संगठनों में हाइब्रिड कंप्यूटर का उपयोग किया जा सकता है।

माइक्रोसॉफ्ट सर्फेस बहुत ही प्रख्यात प्रकार का हाइब्रिड कंप्यूटर है जो यूजर की आवश्यकता के अनुसार कई वर्जन प्रदान करता है। चूंकि कंप्यूटर के दोनों गुणों में एक ही हाइब्रिड सिस्टम होता है, जिससे बहुत जटिल गणनाओं या समस्याओं को हल करना संभव हो जाता है, साथ ही, ये उपकरण न केवल बहुत महंगे होते हैं, बल्कि जटिल मुद्दों को थोड़ा तेजी से हल करने में भी सक्षम होते हैं।

हाइब्रिड कंप्यूटर के क्या कार्य हैं? (Functions of Hybrid Computer)

विशिष्ट समस्या को हल करने के लिए हाइब्रिड कंप्यूटर विकसित किया गया है। अत: आवश्यकता के अनुसार जिसमें विशेष कार्य को करने के लिए विभिन्न प्रकार के कॉम्पोनेंट्स को एम्बेड किया जाता है। हाइब्रिड कंप्यूटर तेजी से सटीक परिणाम देते हैं।

हाइब्रिड कंप्यूटर के प्रकार (Types of Hybrid Computer)

हाइब्रिड कंप्यूटर तीन प्रकार के होते हैं। जैसे कि:-

  • Large Electronic Hybrid Computer
  • General Purpose Hybrid Computer
  • Special Purpose Hybrid Computer

Large Electronic Hybrid Computer

1960-1980 में विभिन्न सैकड़ों ऑपरेशन एम्प्लीफायरों का उपयोग करके बड़े इलेक्ट्रॉनिक हाइब्रिड कंप्यूटर बनाए गए थे। ये हाइब्रिड कंप्यूटर अंतर समीकरणों के अधिक जटिल सेट को हल करने में सक्षम हैं।

उदाहरण है:- फ्रीडम स्पेस फ्लाइट, केमिकल रिएक्शन कैनेटीक्स, ह्यूमन इम्यूनोप्रेसिव सिस्टम, फूड प्रोसेसिंग प्लांट और बहुत कुछ।

General Purpose Hybrid Computer

इस प्रकार के कंप्यूटर कई एप्लीकेशंस का उपयोग करने में सक्षम होने के साथ-साथ कई प्रकार के मुद्दों को हल करने की क्षमता रखते हैं। यह कंप्यूटर हाई स्पीड के साथ एक साथ कई कार्य कर सकता है, और यह सिस्टम के संपूर्ण प्रदर्शन को बेहतर बनाने में भी मदद करता है।

Special Purpose Hybrid Computer

इस प्रकार के कंप्यूटरों में विशिष्ट समस्या को हल करने के लिए निश्चित कार्यक्रम होते हैं, और अधिकतर वे सबसिस्टम सिम्युलेटर, फंक्शन कंट्रोलर या परिणाम विश्लेषक जैसे भौतिक सिस्टम में एम्बेडड होते हैं।

उदाहरण हैं:- न्यूमैटिक कंप्यूटर इनपुट सिग्नल के सटीक गुणन, विभाजन, वर्ग या वर्ग-मूल कार्यों को उत्पन्न करने के लिए वायु धौंकनी और फ्लैपर नोजल का उपयोग करता है, और डाटा को हवा के दबाव के रूप में इनकोडिंग करता है।

हाइब्रिड कंप्यूटर के उदाहरण कौन से हैं? (Examples of Hybrid Computer)

कई एप्लीकेशंस में हाइब्रिड कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है। जैसे कि:-

  • पेट्रोल पम्प– माप ईंधन प्रवाह को मुद्रा दर में परिवर्तित करता है।
  • रोगी के दिल की धड़कन का मापन।
  • वैज्ञानिक प्रयोगशाला
  • एप्लाइड मनोविज्ञान।
  • इंडस्ट्रियल प्रोसेस का कंट्रोल
  • रक्षा क्षेत्र
  • एयरलाइंस क्षेत्र
  • जहाज
  • सीमेंट कारखाना
  • गैस पंप स्टेशन
  • रडार सिस्टम
  • वैज्ञानिक गणना
  • मौसम प्रणाली गणना
  • परमाणु रिएक्टर की निगरानी और नियंत्रण
  • इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम मशीन
  • इकोकार्डियोग्राम मशीन
  • अल्ट्रासाउंड मशीन
  • सीटी स्कैन मशीन
  • होल्टर मॉनिटरिंग मशीन
  • ATM मशीन
  • अस्पताल – गहन चिकित्सा इकाई (ICU)
  • गैस और बिजली से चलने वाली कार

सेल फोन

एनालॉग ध्वनि को पकड़ो और डिजिटल सिग्नल में बदलो और अंत में इसे डिजिटल डाटा नेटवर्क पर प्रसारित करें, और यूजर इसे प्राप्त कर सकता है और एनालॉग स्पीकर में फीड कर सकता है।

हाइब्रिड कंप्यूटर के लाभ( Advantages of Hybrid Computer)

  • हाइब्रिड कम्प्यूटर एनालॉग और डिजिटल कंप्यूटर दोनों का मिक्सर है।
  • यह एनालॉग की सटीकता लेता है लेकिन डिजिटल कंप्यूटर की गति।
  • यह जल्दी से और सटीक परिणाम देता है।
  • यह वास्तविक समय में बड़े समीकरणों को हल करने में मदद करता है।
  • ऑनलाइन डाटा प्रोसेसिंग

हाइब्रिड कंप्यूटर के नुकसान( Disadvantages of Hybrid Computer)

  • हाइब्रिड कंप्यूटर अधिक महंगा होता है क्योंकि इसमें कई नेटवर्क, नोड्स, हब महंगे सर्किट आदि का उपयोग किया जाता है। इसलिए यह हर यूजर के लिए उपलब्ध नहीं है।
  • हाइब्रिड कंप्यूटर डिजाइन करने से पहले सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और अन्य कॉन्फ़िगरेशन के उपयोग के लिए उचित योजना बनानी चाहिए।
  • हाइब्रिड कंप्यूटर का उपयोग केवल विशिष्ट कार्यों को करने के लिए किया जाता है।
  • इन कंप्यूटरों का हार्डवेयर जटिल है क्योंकि इन कंप्यूटरों को डिजिटल सिग्नल को एनालॉग सिग्नल और एनालॉग सिगनल को डिजिटल सिगनल में बदलना होता है।
  • इन कंप्यूटरों को चलाने के लिए इनके सॉफ्टवेयर की पूरी जानकारी होना जरूरी है।

विभिन्न क्षेत्रों में हाइब्रिड कंप्यूटर का उपयोग( Uses of Hybrid Computer)

हाइब्रिड कंप्यूटर निम्नलिखित में कार्यों और उपयोग को प्रभावी ढंग से हल करते हैं:-

  • एक रियल टाइम ऑटोमेटिक सिस्टम नियंत्रण की मॉडलिंग करना, जिसमें एनालॉग और डिजिटल डिवाइस दोनों की विशेषताएं शामिल हैं।
  • इसका उपयोग अस्पताल के आईसीयू (इंसेंटिव यूनिट केयर)में होता है।
  • जहाजों, रक्षा क्षेत्र, एयरलाइन शेत्र और रडार सिस्टम जैसे क्षेत्रों में भी लागू।
  • वास्तविक समय की प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है, जिसमें उच्च आवृत्ति घटक और चर शामिल होते हैं, जो एक विशाल सीमा और आवृत्ति सीमा में भिन्न होते हैं।
  • सीमेंट कारखाने और गैस पंप स्टेशन जैसे संयंत्र।
  • जैविक प्रणाली मॉडलिंग।
  • अल्ट्रासाउंड मशीन,सीटी स्कैन मशीन और एटीएम जैसी डिजिटल मशीनें।
  • सांख्यिकीय मॉडलिंग।
  • आंशिक व्युत्पन्न में समीकरणों का समाधान।
  • कंट्रोल सिस्टम का ऑप्टिमाइजेशन।

उद्देश्य के आधार पर कंप्यूटर के प्रकार(Based on Purpose)

कंप्यूटर को उद्देश्य के आधार पर दो भागों में Special Purpose computer और General Pupose Computer के आधार पर बांटा गया है।

General Purpose Computer

आज जो कंप्यूटर हम उपयोग करते हैं वे सभी लगभग General Purpose computer ही होते हैं। इसमें अनेक प्रकार के कार्य करने की क्षमता होती है। यह ऐसे कंप्यूटर होते हैं, जिसे समान्य कार्य जैसे- शब्द प्रक्रिया, डाटाबेस, प्रबंधन, लेखन आदि के डिजाइन किया जाता है।

इन कंप्यूटर में लगे हुए CPU की क्षमता कम होने के कारण हम इन कंप्यूटर में किसी विशिष्ट काम के लिए कोई स्पेशल डिवाइस कनेक्ट नही कर सकते। इसलिए इस तरह के कंप्यूटर का उपयोग सिर्फ सामान्य उद्देश्य के लिए ही किया जाता है।

Special Purpose Computer

स्पेशल पर्पस कंप्यूटर ये ऐसे कंप्यूटर होते हैं, जो किसी विशेष कार्य करने के लिए तैयार किए जाते है। इन कंप्यूटर के CPU की क्षमता जनरल पर्पस कंप्यूटर के CPU से अधिक ज्यादा होती है। इन कंप्यूटर का उपयोग मौसम विभाग, यातायात नियंत्रण, अंतरिक्ष विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरिंग इन क्षेत्रों में किया जाता है।

आकार के आधार पर कंप्यूटर के प्रकार (Based on Size)

कंप्यूटर को आकार के आधार पर हम निमानलीखित श्रेणियों में बांट सकते हैं। जिसकी जानकारी हम आपको आगे के लेख में पढ़ने को मिलेंगी:-

Super Computer

सुपर कंप्यूटर दुनिया का सबसे तेज कंप्यूटर है जो डाटा को बहुत तेजी से प्रोसेस कर सकता है। एक जनरल पर्पस कंप्यूटर की तुलना में ” सुपर कंप्यूटर ” के कंप्यूटिंग परफॉर्मेंस को बहुत अधिक मापा जाता है। सुपर कंप्यूटर की कंप्यूटिंग परफॉर्मेंस को MIPS के बजाय FLOPS(Floating -point operations per second)में मापा जाता है। सुपर कंप्यूटर में हजारों प्रोसेसर होते हैं, जो प्रति सेकंड अरबों और खरबों की गणना कर सकते हैं या आप कह सकते हैं कि सुपरकंप्यूटर FLOPS के लगभग 100 क्वैडिल तक पहुंचा सकते हैं।

सुपर कंप्यूटर 1960 में शुरू किए गए और मैनचेस्टर विश्वविद्यालय में एटलस के साथ सेमुर के द्वारा विकसित किए गए थे। क्रे ने सीडीसी 1604 को डिजाइन किया था जो दुनिया का पहला सुपर कंप्यूटर था और यह ट्रांजिस्टर के साथ वेक्यूम ट्यूब को बदल देता है। इनमें क्लस्टर सिस्टम का प्रयोग किया जाता है। क्लस्टर सिस्टम कंप्यूटिंग का मतलब है कि मशीन एक नेटवर्क में अलग-अलग कंप्यूटरों के ऐरे के बजाय एक सिस्टम में कई प्रोसेसर का उपयोग करती है।

इन कंप्यूटर का आकार बड़ा होता है। सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर कुछ फीट से लेकर सैकड़ों फीट तक हो सकते हैं।सुपर कंप्यूटर की कीमत $200000 से $100 मिलियन से अधिक हो सकती है। दुनिया में सबसे तेज सुपर कंप्यूटर Sunway taihulight था, चीन के विक्सू शहर में, जो चीन के नेशनल रिसर्च सेंटर ऑफ पैरेलल कंप्यूटर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (NRCPC)द्वारा विकसित किया गया।

सुपर कंप्यूटर की विशेषताएं (Features of super computer)

  • यह एक बार में 100 से अधिक यूजर्स को सपोर्ट कर सकता है।
  • यह मशीनें भारी मात्रा में गणना को हल करने में सक्षम है जो मानव क्षमताओं से परे है, अर्थात मानव इस तरह की व्यापक गणनाओं को हल करने में असमर्थ है।
  • कोई व्यक्ति एक ही समय में सुपर कंप्यूटर तक पहुंच सकते हैं।
  • यह सबसे महंगी कंप्यूटर हैं जिन्हें कभी भी बनाया जा सकता है।
  • सुपर कंप्यूटर में एक से अधिक सीपीयू(Central processing यूनिट) होते हैं, जिसमें इंस्ट्रक्शन होते हैं ताकि यह इंस्ट्रक्शन की व्याख्या कर सके और अर्थमैटिक और लॉजिकल कार्यों को जल्दी कर सकते।
  • सुपर कंप्यूटर सीपीयू की अत्याधिक हाई संगणना स्पीड को सपोर्ट करता है।
  • यह संख्याओं के जोड़ के बजाय संख्या की सूचियों के जोड़ पर काम करते हैं।
  • इनका उपयोग शुरू में राष्ट्रीय सुरक्षा, परमाणु हथियार डिजाइन और क्रिप्टोग्राफी से संबंधित एप्लीकेशन में किया गया था। लेकिन आजकल एयरोस्पेस, आटोमोटिव और पेट्रोलियम उद्योगों द्वारा भी कार्यरत है।

सुपर कंप्यूटर की विशेषताएं (Features of super computer)

  • यह एक बार में 100 से अधिक यूजर्स को सपोर्ट कर सकता है।
  • यह मशीनें भारी मात्रा में गणना को हल करने में सक्षम है जो मानव क्षमताओं से परे है, अर्थात मानव इस तरह की व्यापक गणनाओं को हल करने में असमर्थ है।
  • कोई व्यक्ति एक ही समय में सुपर कंप्यूटर तक पहुंच सकते हैं।
  • यह सबसे महंगे कंप्यूटर हैं जिन्हें कभी भी बनाया जा सकता है।
  • सुपर कंप्यूटर में एक से अधिक सीपीयू(Central processing यूनिट) होते हैं, जिसमें इंस्ट्रक्शन होते हैं ताकि यह इंस्ट्रक्शन की व्याख्या कर सके और अर्थमैटिक और लॉजिकल कार्यों को जल्दी कर सकते।
  • सुपर कंप्यूटर सीपीयू की अत्याधिक हाई संगणना स्पीड को सपोर्ट करता है।
  • यह संख्याओं के जोड़ के बजाय संख्या की सूचियों के जोड़ पर काम करते हैं।
  • इनका उपयोग शुरू में राष्ट्रीय सुरक्षा, परमाणु हथियार डिजाइन और क्रिप्टोग्राफी से संबंधित एप्लीकेशन में किया गया था। लेकिन आजकल एयरोस्पेस, आटोमोटिव और पेट्रोलियम उद्योगों द्वारा भी कार्यरत है।

सुपर कंप्यूटर के उपयोग (Uses of super computer)

  • सुपर कंप्यूटरों का उपयोग उनकी श्रेष्ठता के कारण रोजमर्रा के कार्यों के लिए नहीं किया जाता है।
  • सुपर कंप्यूटर उन एप्लीकेशन को संभालता है, जिन्हें real-time processing की आवश्यकता होती है उपयोग किस प्रकार हैं:
  • इनका उपयोग मौसम के पूर्वानुमान, मौसम विज्ञान, परमाणु ऊर्जा अनुसंधान, भौतिकी और रसायन विज्ञान के साथ साथ बेहद जटिल एनिमेटेड ग्राफिक्स जैसे वैज्ञानिक सिमुलेशन और अनुसंधान के लिए किया जाता है। इसी के साथ इनका उपयोग नई बीमारियों का पता लगाने और बीमारी के व्यवहार और उपचार की भविष्यवाणी करने के लिए भी किया जाता है।
  • सैन्य नए कंप्यूटरों, टैंकों और हथियारों के परीक्षण के लिए सुपर कंप्यूटर का उपयोग करता है। इनका सैनिकों और युद्धों पर प्रभाव को समझने के लिए भी उपयोग किया जाता है। इन मशीनों का उपयोग डाटा को इंक्रिप्ट करने के लिए भी किया जाता है।
  • वैज्ञानिक परमाणु हथियार विस्फोट के प्रभाव का परीक्षण करने के लिए इनका प्रयोग करते हैं।
  • हॉलीवुड एनिमेशन के निर्माण के लिए सुपर कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है।
  • मनोरंजन में सुपर कंप्यूटर ऑनलाइन गेमिंग के लिए उपयोग किया जाता है।

सुपर कंप्यूटर गेम प्रदर्शन को स्थिर करने में मदद करता है जब बहुत सारे यूजर से खेल रहे होते हैं।

सुपर कंप्यूटर के फायदे(Advantages of super computer)

सुपर कंप्यूटर के कई फायदे हैं जो निमानलीखित हैं:-

Cost Effective

सुपर कंप्यूटर का उपयोग करने वाली कंपनियां कार्यों को मैनेज करने में बहुत समय बचाती हैं। यह न केवल अच्छे  परिणाम देता है बल्कि यह लंबे समय में लागत को कम करता है। साथ ही, सुपर कंप्यूटर का उपयोग करके संगठनों को महंगे भौतिक मॉडल खरीदने की कोई आवश्यकता नहीं होती है।

Security

एक सुपर कंप्यूटर पासवर्ड को डिक्रिप्ट करके बेहतर सुरक्षा प्रदान करता है। यहां तक कि अन्य उपकरणों में उपयोग किए जाने वाले पासवर्ड भी सुपर कंप्यूटर द्वारा डिक्रिप्ट किए जा सकते हैं। डिक्रिप्ट करने के अलावा, एक सुपर कंप्यूटर आसानी से पासवर्ड का अनुमान लगा सकता है।

Speed

सुपर कंप्यूटर को कार्यों को प्रोसेस करने में लगने वाला समय काफी कम होता है। वे आमतौर पर गणनाओं को हल करने में बहुत कम समय लेते हैं।एक सामान्य कंप्यूटर की तुलना में, यह दर लगभग 100-1000 गुना कम है।मतलब, एक कार्य जिसे पूरा करने में कई घंटे लगते हैं। एक सुपर कंप्यूटर द्वारा सेकंड के अंश में समाप्त किया जा सकता है।

Complex Tasks

सुपर कंप्यूटर की सहायता से जटिल कार्य जैसे एनिमेशन प्रस्तुत करना आसानी से किया जा सकता है। Fast rendering के साथ, यह कुल मिलाकर एक अच्छा परिणाम देता है।

Environment Friendly

एक सुपर कंप्यूटर वैज्ञानिक और चिकित्सा अनुसंधान के लिए वर्चुलाइज्ड परीक्षण वातावरण(virtualized testing environment) प्रदान करके कुछ हद तक पर्यावरण के अनुकूल है। परमाणु हथियार परीक्षण जैसे रियल-टाइम परीक्षण को पर्यावरण के लिए कई खतरो का कारण माना जाता है।

सुपर कंप्यूटर के नुकसान(Disadvantages of super computer)

फायदों के साथ साथ सुपर कंप्यूटर के कई नुकसान भी हैं जो निमानलीखित है:-

Size

सुपर कंप्यूटर भी आकार में बहुत बड़े होते हैं। इसलिए, उन्हें बहुत अधिक जगह की आवश्यकता होती है। एक सुपर कंप्यूटर आमतौर पर 1000 वर्ग से अधिक क्षेत्र लेता है।

Maintenance

सुपर कंप्यूटर की निगरानी के लिए एक विशेषज्ञ स्टाफ की नियुक्ति की आवश्यकता होती है। इस उद्देश्य के लिए, एक विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाता है जो failures और कंप्यूटर के overall usage का पता लगाने में सक्षम है।

Storage

सुपर कंप्यूटर की पूर्ण क्षमता प्राप्त करने के लिए, इसे बड़ी मात्रा में storage space की जरूरत होती है। जो भी डाटा प्रोड्यूस किया जा रहा है उसे स्टोरेज ड्राइव द्वारा समायोजित किया जाएगा। इसलिए इसमें सभी डाटा को स्टोर करने के लिए पर्याप्त space होना चाहिए। पर्याप्त storage space के बिना, सुपर कंप्यूटर गणना नहीं कर सकता है।

Heat Release

एक सुपर कंप्यूटर बड़ी संख्या में प्रोसेसर से लैस होता है। जो अपने संचालन के दौरान बड़ी मात्रा में गर्मी उत्पन्न कर सकता है। इस गर्मी के कारण, अधिकांश उपकरण आसानी से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।

Power Consumption

सुपर आमतौर पर बड़ी मात्रा में बिजली की खपत करते हैं। एक सुपर कंप्यूटर को औसतन लगभग 4 मेगावाट (MW) बिजली की आवश्यकता होती है। यह राशि एक समान है घर की तुलना में लगभग 5000 गुना अधिक है। यह सब बिजली के खर्च में वृद्धि का कारण बन सकता है।

Mainframe Computer

मेनफ्रेम कंप्यूटर आकार में बहुत बड़े होते हैं। साथ ही इनकी स्टोरेज क्षमता भी अधिक होती है। इन में अधिक मात्रा के डाटा पर तीव्रता से प्रोसेस करने की क्षमता होती है इसलिए इनका उपयोग बड़ी कंपनियां, बैंक तथा सरकारी विभाग एक सेंट्रलाइज कंप्यूटर सिस्टम के रुप में करते हैं। यह 24 घंटे कार्य कर सकते हैं और इन पर सैकड़ों यूजर्स एक साथ काम कर सकते हैं।

1951 में UNIVAC I (Universal automatic computer I) मेनफ्रेम कंप्यूटर को पहली बार USA में J| Presper Eckert और John Mauchly द्वारा विकसित किया गया था। Z ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग 64-bit O/S के साथ विशेष रूप से IBM मेनफ्रेम कंप्यूटर के लिए किया जाता है, इसे IBM संगठन द्वारा डिजाइन किया गया है। मेनफ्रेम कंप्यूटर को एक नेटवर्क या माइक्रो कंप्यूटर में से परस्पर जोड़ा जा सकता है। अधिकतर कंपनियां या संस्थाएं मेनफ्रेम कंप्यूटर का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए करती हैं।

  • उपभोक्ताओं द्वारा खरीद का व्यवहार रखना
  • भुगतानों का ब्यौरा रखना
  • बिलों को भेजना
  • नोटिस भेजना
  • कर्मचारियों के भुगतान करना
  • कर का विस्तृत ब्योरा रखना इत्यादि

IBM 4381, ICL 39 Series and CDS Cyber series मेनफ्रेम कंप्यूटर के उदाहरण हैं।

मेनफ्रेम कंप्यूटर का उपयोग कौन करता है? (Who use Mainframe Computer?)

मेनफ्रेम कंप्यूटर हर एक सेकंड में लाखों लेनदेन को करने के लिए सबसे अच्छा मंच है। इसलिए मेनफ्रेम कंप्यूटर का उपयोग बड़े पैमाने पर संगठन में किया जाता है, क्योंकि उन्हें हर सेकंड में एक बार बड़े पैमाने पर डाटा  को प्रोसेस करने की आवश्यकता होती है ।

कुछ कंपनियां हैं जो मेनफ्रेम कंप्यूटर सिस्टम का उपयोग करती हैं जैसे Wallmart, HSBN, Indian Railways, ICICI and HDFC banks, Tesco, Kenya Power, Vodafone, AIG, Coca Cola, RBI, DHL, Ford, Nasdaq, Nike, Tata, Travelport, UPS, USA Postal Services के लिए किया जाता है।

मेनफ्रेम कंप्यूटर के घटक (Components of Mainframe Computer)

मेनफ्रेम कंप्यूटर के कुछ प्रमुख घटक हैं जो मेनफ्रेम कंप्यूटर सिस्टम के पूरे प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Processing Unit

सीपीयू में विभिन्न प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, मेमोरी मॉड्यूल, विभिन्न प्रोसेसर और प्रत्येक चैनल के लिए इंटरफ़ेस होता है। सभी चैनल इनपुट/आउटपुट टर्मिनल और मेमोरी मॉड्यूल के बीच कम्युनिकेशन के माध्यम के रूप में काम करते हैं। सभी चैनलों को उपयोग करने का मुख्य उद्देश्य डाटा को ट्रांसफर करना और सिस्टम कॉम्पोनेंट्स को मैनेज करना है।

Controller Unit

Controller unit को bus भी कहा जाता है। मेनफ्रेम कंप्यूटर सिस्टम में विभिन्न डिवाइस जैसे टेप, डिस्क आदि के लिए कई बसें हैं।

Storage Unit

Storage unit का उपयोग विभिन्न कार्यों जैसे कि insertion data, saving, retrieving, and access data के लिए किया जाता है। Storage unit में हार्ड ड्राइव जैसे कई डिवाइस शामिल हैं। जैसे कि टेप ड्राइव, पंच कार्ड आदि और यह सभी डिवाइस सीपीयू द्वारा कंट्रोल होते हैं।

Multiprocessors

मेनफ्रेम कंप्यूटर सिस्टम में मल्टिप्रोसेसर यूनिट होती है। इसका मतलब है कि इसमें छोटे समय सीमा में बड़े डाटा को प्रोसेस करने के लिए (त्रुटि हैंडलिंग और इंटरप्ट हैंडलिंग के साथ)कई प्रोसेसर होते हैं।

Motherboard

मेनफ्रेम में मदरबोर्ड में कई हाई स्पीड प्रोसेसर,  मेन मेमोरी (RAM) और अलग-अलग हार्डवेयर भाग होते हैं। जो इसके बस आर्किटेक्चर के माध्यम से अपना कार्य करते हैं। इस मदरबोर्ड में, 128 Bit buses का उपयोग किया जाता है।

Cluster Controller System

यह विशेष डिवाइस है जिसे चैनल टर्मिनल को होस्ट करने के लिए और टर्मिनल सिस्टम को जोड़ने के लिए डिजाइन किया गया है। क्लस्टर कंट्रोल सिस्टम के दो प्रकार होते हैं जैसे चैनल channel-attached cluster controllers और link-attached cluster controllers।

Input/output Channels

  • मेनफ्रेम में कंप्यूटर सिस्टम कुछ तकनीकों का प्रयोग करता है जैसे IOCDS, ESCON, FICON, CHIPDI
  • IOCDS – IOCDS का मतलब I/O Control Data set
  • ESCON- ESCON का पूरा नाम Enterprise systems connection
  • FICON- FICON का अर्थ है Fiber connector

Examples of Mainframe Computer

Z series mainframe computer के प्रकार ( types of Z series mainframe computer)

  • IBM z15
  • IBM z14
  • IBM System z13
  • IBM z Enterprise system
  • IBM System z10
  • IBM System z9

Other Types of Mainframe Computer

  • Tianhe-1A; NYDT YH Cluster
  • Jaguar; Cray XT5
  • Nebulae; Drawning TC3600 Blade
  • TSUBAME 2|0; HP Cluster Platform 3000SL
  • Hopper; Cray XE6
  • System z9
  • System z10 servers
  • HP Mainframe
  • IBM 370,S/390
  • Fujitsu’s ICL VME
  • Hitachi’s Z800
  • I Series System
  • AS/400 System
  • 34/36 System

मेनफ्रेम कंप्यूटर के कार्य (Funtions of mainframe computer)

मेनफ्रेम कंप्यूटर के कार्य को अलग-अलग खंडों में विभाजित किया गया है, नीचे हर खंडों का वर्णन किया गया है।

Data Warehouse System

हर कंप्यूटर में लंबे जीवन के लिए डाटा स्टोर करने के लिए हार्ड डिस्क होती है, लेकिन मेनफ्रेम कंप्यूटर पूरे डाटा को एप्लीकेशन फॉर्म में सेव करता है। जब सभी उपयोगकर्ता अपने जुड़े टर्मिनलों के साथ दूरस्थ रूप से लॉगिन करने की कोशिश करते हैं तो मेनफ्रेम कंप्यूटर सभी रिमोट टर्मिनलों को उनकी सभी फाइलों के साथ-साथ प्रोग्राम तक पहुंचाने की अनुमति देता है।

Preserve Authentication Access Permission

सभी डाटा और प्रोग्राम फाइलों को मेनफ्रेम सिस्टम में स्टोर करने के कारण, यह अपनी क्षमता में वृद्धि कर सकता है। एडमिनिस्ट्रेटर सभी इंसर्ट एप्लीकेशन और डाटा को मेनफ्रेम सिस्टम में एक्सेस कर सकते हैं और वह यह भी तय कर सकते हैं कि कितने उपयोगकर्ता इसे एक्सेस कर सकते हैं।

Allot Processor Time Frame

मेनफ्रेम कंप्यूटर सिस्टम में सभी यूजर में विभाजित होने के लिए प्रोसेसिंग समय की सीमत संख्या है, जो वर्तमान में सिस्टम के साथ लाग इन है। मेनफ्रेम सिस्टम यह तय करता है कि किस प्रकार की प्राथमिकताओं को विभिन्न प्रकार के उपयोगकर्ताओं के साथ जोड़ा जाना चाहिए। एडमिनिस्ट्रेटर के पास चयन करने की शक्ति होती है कि वह प्रोसेसर समय में कैसे निर्दिष्ट करें।

Mini Computer

Mini computer का आकार माइक्रो कंप्यूटर और मेनफ्रेम कंप्यूटर के बीच का होता है। यानि माइक्रो कंप्यूटर से बड़ा व मेनफ्रेम कंप्यूटर से छोटा होता है। ये कंप्यूटर छोटी जगहों जैसे व्यापार, कंप्यूटर सेंटर आदि में काम में लिए जाते हैं। मिनी कंप्यूटर का सबसे ज्यादा उपयोग डाटाबेस मैनेजमेंट, फाइल हैंडलिंग, बिजनेस ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग आदि कामों में किया जाता है। मिनी कंप्यूटर को Mid Range Server भी कहते हैं। यह नेटवर्क का एक भाग माना जाता है।

मिनी कंप्यूटर की परिभाषा क्या है?(Definition of mini computer)

Mini computer वे कंप्यूटर होते हैं जो आकार में छोटे होते हैं और इनकी भंडारण क्षमता अधिक होती है। यह कंप्यूटर बहू-प्रयोक्ता प्रणाली के होते हैं। मिनी कंप्यूटर के बारे में आप मिनी कंप्यूटर विकीपीडिया पर भी जान सकते हैं।

Name of First Mini Computer

दुनिया का सबसे पहला मिनी कंप्यूटर जो कि उपयोग में लाया गया। वह सन् 1960 के लगभग IBM Company(International Business Machines Corporation) के द्वारा बनाया गया। पहले मिनी कंप्यूटर का नाम PDP-1 था। शुरुआत में ये मिनी कंप्यूटर बिजनेस एप्लीकेशन और सर्विस को टारगेट रखते हुए बनाया गया। इसका कारण यह था कि इनकी performance और working power मेनफ्रेम कंप्यूटर के बराबर ही थी।

मिनी कंप्यूटर का इतिहास

मिनी कंप्यूटर का इतिहास बहुत शानदार है। Digital Equipment Corp(DEC) कंपनी ने अपना सबसे पहला कंप्यूटर जो कि मिनी कंप्यूटर था। वो सन् 1960 में जारी कर दिया। इस मिनी कंप्यूटर की कीमत लगभग 125,000 से 250,000 US Dollar में थी। यह कंप्यूटर दुनिया में आते ही काफी प्रसिद्ध हुआ। मिनी कंप्यूटर का development बेंजामिन कर्ले ने किया था। DEC Company ने जो कंप्यूटर बनाया उसका नाम PDP-1 रखा जो कि एक small Interactive computer था।

PDP-1 मिनी कंप्यूटर लगभग 120,000 डॉलर में बेचा गया था। जो कि उस समय सबसे सस्ता कंप्यूटर था। PDP-1 एक 18 बिट मशीन थी, जिसको बेंजामिन कर्ले ने बनाया था। दोस्तो वैसे इससे पहले भी IBM कंपनी ने 1940 में एक मिनी कंप्यूटर का निर्माण किया था। और उसका इस्तेमाल कंप्यूटर बिजनेस एप्लीकेशन और सर्विस को ध्यान में रखते हुए इसको बनाया था। इनके परफॉर्मेंस और वर्किंग कैपेसिटी मेनफ्रेम कंप्यूटर के समान होती है।

मिनी कंप्यूटर के उपयोग

इनका अधिकाधिक प्रयोग प्रक्रिया नियंत्रण (process control) में होता है। इसे किसी कंप्यूटर नेटवर्क के केंद्रीय कंप्यूटर के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। मिनी कंप्यूटर का इस्तेमाल कंप्यूटर के छोटे कामों में होता है। इस कंप्यूटर का प्रयोग स्कैनिंग और प्रिंटिंग में काम लिया जाता है।

मिनी कंप्यूटर के उदाहरण

माइटी फ्रेम और मेक मिनी, मिनी कंप्यूटर के उदाहरण है।

मिनी कंप्यूटर की विशेषताएं

इनका आकार माइक्रो कंप्यूटर से बड़ा तथा मेनफ्रेम से छोटा होता है। इन कंप्यूटर को एक से अधिक व्यक्ति एक साथ काम में ले सकते हैं। यह कंप्यूटर बहु-प्रयोक्ता प्रणाली पर आधारित होने के कारण वितरित डाटा प्रोसेसिंग(Distributed data processing) में इनका इस्तेमाल किया जाता है। उनकी स्टोरेज कैपेसिटी तथा प्रोसेसिंग स्पीड माइक्रो कंप्यूटर की तुलना में अधिक होती है इनकी कीमत भी 5-7 लाख रुपए अथवा इससे अधिक होती है। इनका अधिकाधिक प्रयोग प्रक्रिया नियंत्रण (process control) में होता है तथा इसे किसी कंप्यूटर नेटवर्क के केंद्रीय कंप्यूटर के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।

PDP-1, DEC आदि सर्वाधिक प्रचलित मिनी कंप्यूटर है।

Micro Computer

माइक्रो कंप्यूटर नाम से ही पता चलता है कि यह छोटा कंप्यूटर है लगभग 1970 के दशक में माइक्रो कंप्यूटर का उद्भव हुआ। यह कंप्यूटर आकार में बहुत छोटे कंप्यूटर होते हैं। माइक्रो कंप्यूटर में माइक्रो प्रोसेसर लगा होता है जो कि CPU के अंदर लगता है।

माइक्रो कंप्यूटर की परिभाषा (Definition of Micro Computer)

माइक्रो कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस है। जिस में CPU के रूप में Micro Processor Computer का उपयोग किया जाता है। यानि इसमें CPU एक Single Integrated Semiconductor Chip के रूप में होता है। यह Semiconductor Chip ही सभी लॉजिकल तथा अर्थमेटिक काम करने में सक्षम होती है। मेमोरी के लिए भी इसमें Semiconductor Chip का ही इस्तेमाल किया जाता है। तथा प्रोग्राम के द्वारा मेमोरी के लिए लगी Semiconductor Chip में डाटा स्टोर करवाया जा सकता है।

माइक्रो कंप्यूटर के प्रकार (Types of Micro Computer)

जिस तरह कंप्यूटर के अलग-अलग टाइप्स  होते हैं ठीक उसी प्रकार क्लासिफिकेशन ऑफ माइक्रो कंप्यूटर में कई तरह के होते हैं जो कि-

  • Desktop Computer
  • Laptop Computer
  • Handheld Computer
  • Work Station
  • Mobile Phone
  • Gaming Console
  • Notebook Computer
  • Calculator आदि

माइक्रो कंप्यूटर का इस्तेमाल (Use of Micro Computer)

कंप्यूटर का इस्तेमाल तो आजकल आम बात हो गई है और माइक्रो कंप्यूटर छोटे तथा कम कीमत के होने के कारण इनका उपयोग सबसे ज्यादा होता है। आज हम देखते हैं कि हर जगह पर इसी कंप्यूटर का उपयोग हो रहा है। माइक्रो कंप्यूटर का इस्तेमाल इस प्रकार से है-

  • Office Work
  • Play Gaming
  • Calculation
  • Create Documents
  • Internet
  • Banking
  • Play Videos

माइक्रो कंप्यूटर का इतिहास (History of Micro Computer)

दुनिया का पहला माइक्रो कंप्यूटर सन् 1974 में Micro Instrumentation and Telemetry Systems ने बनाया था। पहले माइक्रो कंप्यूटर का नाम- ऑल्टेयर 8800 (Altair 8800) था। Altair 8800 सन् 1975 में अमेरिका की एक पुस्तक के पहले पन्ने पर छपने के बाद ज्यादा प्रसिद्ध हुआ था। इस कंप्यूटर में 256 bytes ki RAM लगी हुई थी। बाद में इस कंप्यूटर का आकार और कीमत को कम करते हुए कई प्रकार के कंप्यूटरों का विकास हुआ।

माइक्रो कंप्यूटर की विशेषताएं (Features of Micro Computer)

1970 में माइक्रो प्रोसेसर का विकास हुआ तथा वे सभी कंप्यूटर को माइक्रो प्रोसेसर के मुख्य अवयव के रूप में प्रयोग में लेते थे, माइक्रो कंप्यूटर कहलाये।

  • यह कंप्यूटर साइज में सबसे छोटे तथा कम रेट के होते हैं।
  • Personal use में लिए जाने के कारण इन्हें पर्सनल कंप्यूटर या पीसी (Personal computer or PC) भी कहा जाता है।
  • आरंभिक माइक्रो कंप्यूटर् एक-प्रयोक्ता कंप्यूटर थे अर्थात इन पर एक समय में एक ही प्रयोक्ता काम कर सकता था। परंतु कालान्तर में कंप्यूटर तकनीकी विकास के कारण आजकल के आधुनिक माइक्रो कंप्यूटर बहु-प्रयोक्ता प्रणाली पर आधारित हो गए हैं। जिनमें एक से अधिक प्रयोक्ता काम कर सकता है।
  • इनकी स्टोरेज पावर तथा प्रोसेसिंग की स्पीड बाकी कंप्यूटर की तुलना में कम होती है।
  • IBM-PC, APPLE-II, आदि सर्वश्रेष्ठ माइक्रो कंप्यूटर के उदाहरण हैं। ये थी माइक्रो कंप्यूटर की विशेषताएं।

माइक्रो कंप्यूटर के लाभ-

इस कंप्यूटर के कई लाभ हैं जिनमें निम्न अहम है

  • इसका आकार छोटा होने की वजह से हम इस कंप्यूटर को किसी भी और कहीं भी ले जाकर उपयोग में ले सकते हैं।
  • इस कंप्यूटर की कीमत भी अन्य कंप्यूटर की तुलना में कम है यानी गरीब व्यक्ति भी खरीद सकता है और अपने पर्सनल काम कर सकता है।

Laptop Computer

भारत में कंप्यूटर आने के बाद लोगों ने इसकी उपयोगिता का भली-भांति आंकलन किया। जिस कारण वर्तमान समय में कंप्यूटर का उपयोग घर से लेकर ऑफिस और बिजनस से लेकर शिक्षा क्षेत्रों में किया जाता है। लेकिन तकनीक के विकास के साथ कंप्यूटर का स्थान लैपटॉप ने ले लिया है और अब डेस्क पर कंप्यूटर की बजाय लैपटॉप नजर आने लगे हैं। इसलिए लैपटॉप के बारे में जानकारी होना जरूरी हो गया।

लैपटॉप क्या है (What is laptop)

लैपटॉप एक छोटा पोर्टेबल निजी कंप्यूटर होता है। जिसके 2 भाग होते हैं जो आपस में एक कब्जे के सहारे जुड़े रहते हैं ऊपर वाले से भाग में स्क्रीन होती है तथा नीचे वाले भाग में अन्य कंप्यूटिंग उपकरण जुड़े रहते हैं। इसका डिजाइन Clamshell Form Factor पर आधारित होता है।

लैपटॉप की बनावट तथा फीचर्स के कारण इसे नोटबुक कंप्यूटर तथा नोटबुक डिवाइस आदि नामों से भी जाना जाता है। वर्तमान समय में लैपटॉप की स्क्रीन एलसीडी/एलइडी डिस्पले के रूप में आती है। और इसमें Thin-Screen तकनीक का उपयोग होता है। कंप्यूटर की तरह एक लैपटॉप में सभी इनपुट तथा आउटपुट घटक मौजूद होते हैं।

एक सामान्य लैपटॉप में डिस्पले स्क्रीन, मिनी स्पीकर, हार्ड डिस्क, कीबोर्ड, ऑप्टिकल डिस्क ड्राइव, प्रोसेसर, रैम तथा टचपैड आदि जरूरी फीचर्स होते हैं तथा वर्तमान समय में टेक्नोलॉजी के विकास के साथ वेबकैम, इनबिल्ट माइक्रोफोन तथा टचस्क्रीन जैसे फीचर भी लैपटॉप में आने लगे हैं।

लैपटॉप का इतिहास (History of Laptop)

साल 1968 में Alan Kay द्वारा Xerox Parc में एक निजी Portable Information Manipulator की कल्पना की गई। जिसे उन्होंने 1972 के अपने शोध-पत्र में Dynabook  के नाम से वर्णित किया। तथा जल्द ही लैपटॉप के निर्माण का विचार शुरू किया जाने लगा।

वर्ष 1980 के पहले नोटबुक कंप्यूटर को विकसित किया गया तथा 1983 के बाद कई अन्य तकनीक एवं फीचर्स लैपटॉप में जोड़े गए। जिसमें टचपैड, पॉइंटिग स्टिक, हैंडराइटिंग रिकॉगनिशन आदि शामिल है।

इन पोर्टेबल कंप्यूटर की बैटरी लाइफ को बढ़ाने के लिए कुछ सीपीयू जैसे Intel I386SL के डिजाइन में बदलाव किया जाने लगा जिनमें पावर मैनेजमेंट फीचर का इस्तेमाल होता था।

वर्ष 1988 में डिस्पले साईज (640×480) VGA Resolution को बढ़ाने की ओर कार्य किया गया। तथा उसके बाद 1991 में लैपटॉप में कलर स्क्रीन फीचर भी जोड़ा गया। और समय के साथ लैपटॉप आधुनिक रूप में हमारे सामने है।

लैपटॉप के विभिन्न प्रकार (Types of Laptop)

  • Traditional Laptop
  • Notebook
  • Convertible or Hybrid
  • Desktop Replacement
  • Rugged Laptop
  • Business Laptop

लैपटॉप के विभिन्न भाग (Parts of Laptop)

  • Display
  • CPU
  • GPU
  • Memory
  • Internal Storage
  • Removable Media Drive
  • Input/Output Ports
  • Expansions Cards
  • Battery and Power Supply
  • Cooling Fan
  • Accessories

लैपटॉप की बनावट और उसमें बाहर मौजूद भागों के नाम

  • Camera
  • Display
  • Charging Port
  • Ethernet Port
  • HDMI Port
  • USB Port
  • Audio Jack
  • Mousepad
  • Keypad
  • Other port
  • DVD/CD Writer
  • Indicator Lights
  • SD Card Port

ऊपर बताए गए भाग लैपटॉप मॉडल और मैन्युफैक्चर के अनुसार काम या ज्यादा हो सकते हैं। इसलिए लैपटॉप खरीदने से पहले इसके बारे में पूरी जानकारी जुटा लें।

लैपटॉप के फायदे (Advantages of Laptop)

लैपटॉप की शारीरिक पोर्टेबिलिटी सुविधा के कारण इसका इस्तेमाल हम ना सिर्फ घर तथा ऑफिस में बल्कि कहीं किसी दुकान पर, फ्लाइट में आसानी से कर सकते हैं। हम कहीं भी अपने घुटनों पर लैपटॉप को टिका कर इसे उपयोग में ले सकते हैं। जिन स्थानों में हम कंप्यूटर का उपयोग नहीं कर सकते उस स्थान पर लैपटॉप का उपयोग कर हम अपनी उत्पादकता को बढ़ा सकते हैं।

ऐसे ही कुछ खास लैपटॉप फायदों के बारे में नीचे बता रहें हैं।

छोटा आकार

लैपटॉप का आकार बहुत छोटा होता है। इसलिए यह काफी कम जगह का इस्तेमाल करता है। आप एक छोटे से टेबल पर ही इसे रखकर अपना कार्य शुरू कर सकते हैं।

पोर्टेबल डिवाइस

लैपटॉप का यह फायदा ही इसे डेस्कटॉप कंप्यूटर से उपयोगी बनाता है। आप इसे कहीं भी आसानी से उठाकर ले जा सकते हैं। क्योंकि इसका वजन 3 किलो से भी कम होता है। इसलिए ऑफिस, स्कूल, कॉलेज, होटल, बस, ट्रेन कहीं से भी आप इसे इस्तेमाल कर सकते हैं।

बिजली की जरूरत नही

लैपटॉप पावर के लिए चार्जेबल बैटरी का उपयोग करता है। इसलिए इसे एक बार चार्ज करने के बाद बिना बिजली के इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे आपका बिजली और पैसे दोनो की बचत होती है।

अलग इनपुट-आउटपुट डिवाइसों की कम जरूरत

लैपटॉप में Built -in की-बोर्ड तथा माउस होता है। और कुछ अन्य जरूरी उपकरण जैसे स्पीकर, डिस्पले ब्लूटूथ, वाई-फाई हॉटस्पॉट, हार्ड डिस्क, डीवीडी राइटर आदि होते हैं इसलिए कोई भी अतिरिक्त उपकरण लगाने की आवश्यकता नही पढ़ती है।

आवाज नहीं

लैपटॉप शांति से अपना कार्य करता रहता है। यह डेस्कटॉप कंप्यूटर की तुलना बहुत कम आवाज निकालता है। आप शायद सुन भी नही सकते हैं। यदि आप ज्यादा गौर करेंगे तभी लैपटॉप पंखे की आवाज सुनाई देगी।

बिजली के बिल की बचत

इससे बिजली बचत की जा सकती है। क्योंकि लैपटॉप कंप्यूटर की तुलना में काफी बिजली की खपत कम करते हैं। आमतौर पर लैपटॉप 10 से 20W पर कार्य करते हैं। वहीं दूसरी तरफ कंप्यूटर 100 से 800W बिजली का उपभोग करते हैं। एक कंपनी जहां दिन में सैंकड़ों कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है, वहां लैपटॉप का इस्तेमाल कर बिजली की खपत को कम किया जा सकता है। जिसका सीधा असर बिजली बिल पर पड़ता है। यही हाल हमारे घरों का भी होता है।

ऑल इन वन

लैपटॉप को हम ऑल इन वन डिवाइस कह सकते हैं। क्योंकि इसमें हमें सभी अंग(components) एक डिवाइस में प्राप्त हो जाते हैं। हालांकि पुराने डिवाइस में इंटरनल ड्राइव(सीडी, डीवीडी, इंटरनल ड्राइव) नही होती तथा इनमें एक्सटर्नल ड्राइव को कनेक्ट किया जा सकता है।

लैपटॉप के नुकसान(Disadvantage of Laptop)

महंगा दाम

कंप्यूटर की तुलना में लैपटाप की कीमत काफी अधिक होती है। अत: हर व्यक्ति के लिए बेहतरीन फीचर्स लेपटॉप खरीद पाना आसान नहीं रहता है।

मरम्मत भी महंगी

लैपटॉप के भीतर ही सभी कॉम्पोनेंट इंस्टॉल होते हैं। इसलिए लैपटॉप खराब होने की स्थिति में इसकी मरम्मत का खर्च अधिक होता है, क्योंकि कंप्यूटर की तुलना में लैपटाप के पार्ट्स काफी महंगे होते है। यह एक नाजुक मशीन है। इसलिए काफी ध्यानपूर्वक इसकी मरम्मत करनी पड़ती है। जिसके लिए पेशेवर लोगों की जरूरत पड़ती है।

जल्दी खराब होने के अवसर

लेपटॉप के डैमेज होने की संभावना अधिक रहती है। क्योंकि यह एक इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस होता है। तथा गलती से किसी तरल पदार्थ का लैपटॉप के ऊपर गिर जाने से इनका डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए लैपटॉप के लिए अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है। आप चाय पी रहे हैं और लैपटॉप चला रहे हैं तो इस बात पर जरूर गौर करें।

शारीरिक नुकसान

लैपटॉप का अधिक समय तक उपयोग करने से इससे आंखों, हाथों तथा हड्डियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। वैज्ञानिक भी मानते हैं के लैपटॉप से निकलने वाली हानिकारक किरणें स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। अत: लैपटॉप का अधिक समय तक उपयोग करने के दौरान शरीर से दूर रखना चाहिए।

कस्टमाइज करना आसान नहीं

डेस्कटॉप की तुलना में लैपटाप को आसानी से अपने अनुसार कस्टमाइज करना आसान नहीं होता है। और यह सौदा जेब पर भी महंगा पड़ता है।

Palmtop Computer

अंग्रेजी भाषा में हथेली को पाम कहते हैं। यह कंप्यूटर हमारी हथेली में समा जाता है। इसीलिए इसका नाम पामटाॅप को हैंड हेल्ड कंप्यूटर या PDA(Personal Digital Assistant) या पॉकेट कंप्यूटर भी कहते हैं।

पूर्ण साइज के कंप्यूटर के मुकाबले PDA बहुत ही बौने कहे जा सकते हैं। हालांकि यह फोन बुक तथा कैलेंडर जैसे कार्य हेतु अत्यंत लाभकारी हो सकते हैं। इनमें की-बोर्ड के बजाए पेन का प्रयोग भी किया जा सकता है। जिसके हेतु इनमें हस्तलेख पहचान टेक्नालर प्रयोग कर सकते हैं। PDA एक हैंड हेल्ड डिवाइस है जो निम्न चार तकनीकों को समाहित करता है।

  • कम्प्यूटिंग
  • टेलीफोन/फैक्स
  • इंटरनेट
  • नेटवर्किंग

एक आम PDA फैक्स, मोबाइल फोन, वेब ब्राउजर तथा व्यक्तिगत संगठन का कार्य कर सकते हैं। अतिरिक्त छोटे आकार के कारण पामटाॅप कंप्यूटर में डिस्क में ड्राइव नही होती है। हालांकि कई मशीनों में PCMCIA स्लॉट होते हैं इनके द्वारा हम मॉडम, मेमोरी इत्यादि जोड़ सकते हैं।

Apple Computer PDA लाने वाली पहली कंपनियों में से एक थी। जिसका Newton Message Pad सन् 1993 में लॉन्च हुआ था। इसके बाद कई और निर्माता PDA ले आए हैं। इनके सबसे लोकप्रिय ब्रांड में पाम, Inc कंपनी की Pal-m-Pilots श्रृंखला है। चित्र क्रमांक 6|10 में पामटाॅप कंप्यूटर दिखाया गया है, जो अंत्यंत छोटे आकार का है।

मीडिया कॉरपोरेशन ने हाल ही में पॉकेट आकार का कंप्यूटर निकाला है जो के मात्र 52×52 मिलीमीटर साइज का है। मशीन का नाम टी-क्यूब है जो कि जापान में विकसित टाॅन नाम का ऑपरेट सिस्टम प्रयोग में लाती है। इसका वजन मात्र 165 ग्राम तथा ऊंचाई 45 मिलीमीटर है। का-बाड मॉनिटर अलग से आते हैं, तथा मशीन में built-in हार्ड डिस्क नहीं है|

Conclusion

दोस्तों अब आप जान चुके हैं कि कंप्यूटर क्या होता है कंप्यूटर के प्रकार और कंप्यूटर के फायदे और नुकसान क्या है| हमने अपने इस पोस्ट के जरिए आपको ज्यादा से ज्यादा जानकारी शेयर करने की कोशिश करी है| उम्मीद करते हैं कि आपको हमारे द्वारा शेयर करी गई जानकारी पसंद आई होगी| अगर आपको इस जानकारी से संबंधित कोई भी डाउट हो तो आप हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं|

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Frequently Asked Questions (FAQ’s)

कंप्यूटर का पूरा नाम क्या है?

कंप्यूटर का पूरा नाम ‘Commonly Operated Machine Particularly Used in Technical and Educational रिसर्च यह होता है।

कंप्यूटर कितने प्रकार के होते हैं?

कंप्यूटर के प्रकार को तीन आधारों पर विभाजित किया जाता है, जैसे कार्यप्रणाली के आधार पर, उद्देश्य के आधार पर और आकार के आधार पर। कार्यप्रणाली के आधार पर: Analog Computer, Digital Computer, Hybrid Computer। उद्देश्य के आधार पर: General Purpose Computer और Special Purpose Computer। आकार के आधार पर: Super Computer, Mainframe Computer, Mini Computer, Micro Computer, Laptop Computer और Palmtop Computer।

कंप्यूटर को हिंदी में क्या कहते हैं?

कंप्यूटर को हिंदी में ‘संगणक’ कहा जाता है। कंप्यूटर यह शब्द अंग्रेजी शब्द Compute से आया है, जिसका अर्थ है गणना करना होता है।

कंप्यूटर के पार्ट्स कितने हैं?

Processing Devices

Micro Processor, Mother Board, Graphics Card, RAM, ROM etc

Input Devices

Mouse, Scanner, Touch Screen, Webcam etc

Output Devices

Monitor, Printer, Speaker, Projector, Plotter etc

Storage Devices

Hard Disk, Floppy Disk, CD, DVD etc

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