Data क्या है और इसके प्रकार?

दोस्तों क्या आप जानते हैं कि Data क्या है? आपने इस शब्द के बारे कहीं ना कहीं, कभी ना कभी तो सुना ही होगा और आप खुद भी अक्सर Data शब्द का इस्तेमाल करते ही होंगे| परंतु आपके मन में भी कभी यह सवाल आया होगा कि आखिर डाटा है क्या? Data इतना ज्यादा महत्वपूर्ण क्यों है।

अगर आपको डाटा क्या है इसके बारे में जानकारी नहीं है तो आप घबराइए मत क्योंकि आज के इस पोस्ट में हम डाटा क्या है? डाटा के प्रकार? डाटा महत्वपूर्ण क्यों है? इसके बारे में जानकारी देने जा रहे हैं| 

हमने डाटा के बारे में काफी ज्यादा रिसर्च करी है और रिसर्च करने के बाद ही हम आपके साथ Data से संबंधित इंफॉर्मेशन शेयर करने जा रहे हैं। उससे पहले हम आपको बताना चाहेंगे कि Data सिर्फ कंप्यूटर से संबंधित नहीं है। बल्कि Data Plain Facts को कहा जाता है| Data, datum का plural है| डाटा को हम अलग अलग तरीके से भी बोल सकते हैं जैसे कि स्कूल में बच्चों की संख्या, देश की आबादी, मरीजों की हस्पताल में संख्या, यह सभी चीजें natural form में organized या structured नहीं होती है| इसलिए इनका ज्यादा इस्तेमाल भी नहीं किया जाता है।

वहीं अगर किसी particular context को useful बनाने के लिए उस processes, organized, structured कर present किया जाए तो इसे इंफॉर्मेशन कहा जाता है| तो दोस्तों यह तो अभी हमने आपको डाटा और इंफॉर्मेशन के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी शेयर करी है तो चलिए अब हम डाटा क्या होता है? उसके बारे में जानने की कोशिश करते हैं।

डाटा क्या है (What is Data in Hindi)

डाटा किसी facts, concepts, या instructions को representation करने का एक formalized manner होता है जोकि किसी इलेक्ट्रॉनिक मशीन या इंसान के द्वारा communication, interpretation, या processing करने के लिए सूटेबल होता है।

Data किसी भी फॉर्म में हो सकता है जैसे कि character, text, number, pictures, sound, video etc. Data को हम character या फिर special characters (+,-,/,*,<,>,=) के द्वारा भी represent कर सकते हैं।

डाटा को अगर किसी कम context में नहीं डाला जाता है तो वह Data किसी भी कंप्यूटर या इंसान के लिए किसी भी काम का नहीं होता है| यानी कि जब Data row form में होता है तो वह किसी भी काम का नहीं होता है| जब उसी डाटा को प्रोसेस और इंटरप्रेट करते हैं तब उस डाटा का कोई मतलब निकलता है और तब ही वह डाटा इस्तेमाल करने लायक होता है| इसी processed data को Information भी कहा जाता है।

डाटा का इतिहास

पहली बार इंग्लिश में डाटा शब्द का इस्तेमाल 1640 में किया गया था| उसके बाद कंप्यूटर की दुनिया में डाटा शब्द का इस्तेमाल पहली बार 1946 में किया गया था| यह तब किया गया था जब डाटा को कंप्यूटर में स्टोर एवं ट्रांसफर करना था| इसके अलावा डाटा प्रोसेसिंग शब्द का इस्तेमाल पहली बार 1954 में किया गया था।

Analog Data vs Digital Data

डाटा को हम दो तरीके से रिप्रेजेंट कर सकते हैं Analog और digital. Analog data continuous फॉर्म में होता है और जो अपने actual facts के प्रति represent किया जाता है और वही digital data broken up और discrete फॉर्म में होता है जोकि limited number of elements में होता है| उदाहरण के तौर पर Nature  analog होता है और वही कंप्यूटर digital होता है।

उदाहरण के तौर पर आप इंद्रधनुष में कलर को देख सकते हैं जो कि infinite number के shades प्रदान करता है और जो कि continuous होता है| वही कंप्यूटर सिस्टम में डाटा कंटिन्यूज तो होता है परंतु finite होता है यानी कि आप जितने भी binary digits में डाटा को store करते हैं उनकी एक लिमिट होती है कि वह कितने डाटा को represent कर सकते हैं।

डेटा का उपयोग

आज के इस डिजिटल वर्ल्ड में डाटा का इस्तेमाल eCommerce कंपनी या सोशल मीडिया तथा वेबसाइट पब्लिशर के द्वारा किया जाता है| जब हम डाटा को व्यापार की नजर से देखते हैं तो इसकी importance बहुत ज्यादा पड़ जाती है| अगर आपका कोई भी business है तब आप अपने बिजनेस के लिए वेबसाइट, फेसबुक या यूट्यूब चैनल बनाकर भी अपने business के बारे में कस्टमर को जानकारी दे सकते हैं।

Data के प्रकार

हम आपको बताना चाहेंगे कि कंप्यूटर सिस्टम में अलग-अलग प्रकार के डिजिटल डाटा होते हैं| पहले समय में कंप्यूटर में सिर्फ text और numbers का ही इस्तेमाल किया जाता था| लेकिन आज के modern समय में कंप्यूटर में बहुत सारे मल्टीमीडिया डाटा का भी इस्तेमाल किया जाता है| जैसे कि audio, images, graphics और video.इन सभी डाटा को कंप्यूटर में बाइनरी डिजिट के हिसाब से ही स्टोर किया जाता है। हर एक डाटा टाइप को कंप्यूटर में binary language में convert करने के लिए कुछ specific techniques होती है।

डाटाबेस क्या है?

अगर हम डाटा की बात कर रहे हैं तो हम आपको बताना चाहेंगे कि डेटाबेस के बिना डाटा का मतलब नहीं होता है| database एक organized collection of data होता है जो list में किसी random order में ना डालकर डाटा को ऑर्गेनाइज करने के लिए डेटाबेस की मदद से उन्हें structure किया जाता है।database table एक बहुत ही common data structures होता है| जिसमें मुख्य रुप से rows और columns होते हैं| row को typically एक रिकॉर्ड कहा जाता है और column को typically एक field कहा जाता है।

Information क्या है?

Information एक ऐसा प्रकार का डाटा होता है जिसे meaningful बनाने के लिए process किया गया होता है| ताकि जिस person को यह रिसीव हो रहा है वह उसे समझ सके| डाटा कोई भी चीज हो सकता है जिसे की communicate किया जा सके। वही raw facts को डाटा कहा जाता है और processed data को Information कहा जाता है|

उदाहरण के तौर पर अगर किसी class के students के subject marks, roll number, age, rank को डांटा कहा जाता है| वहीं अगर कहा जाए कि उन students में से बेस्ट 5 students के math के marks को लाया जाए| तब सबसे पहले उस डाटा को categorize किया जाएगा| फिर उसे process करके ही आप उस डाटा को प्राप्त कर सकते हैं और इस प्रकार के रिजल्ट को Information कहते हैं।

Information रिसीवर के लिए बहुत ही meaningful value होती है जो कि बहुत ही organized और classified data होता है| हम यह भी कह सकते हैं कि इंफॉर्मेशन एक प्रकार का प्रोसेस डाटा होता है जिसके ऊपर एक्शन और decisions लिया जा सकता है| अब आप सोच रहे होंगे कि decisions को meaningful कैसे बनाया जा सकता है? डिसीजन को meaningful बनाने के लिए processed data must qualify करने चाहिए कुछ characteristics जोकि है

Timely − जब Information की जरुरत पड़े तब हमेशा समय पर available होनी चाहिए|

Accuracy − Information हमेशा accurate होनी चाहिए|

Completeness − हमेशा complete Information होनी चाहिए|

यदि किसी processed data में ये सभी characteristics होते हैं तब उन्हें ही असल में Information कहा जाता है| 

Data कैसे Store किया जाता है?

Data या information को computer में store करने के लिए hard drive या कोई दूसरे storage device का इस्तेमाल किया जाता है और डाटा को जिस hard drive या स्टोरेज डिवाइस में स्टोर किया जाता है उसे भी दो हिस्सों में categorized किया जाता है।

1. Permanent storage (Hard disk/ Hard drive)

2. Temporary storage (RAM – Random Access memory)

Temporary ओर Permanent  डाटा स्टोरेज में मुख्य अंतर यह है कि जब पावर फेल हो जाता है तो Permanent storage में डाटा को retain किया जा सकता है| आप डाटा को तब तक retain कर सकते हैं जब तक आप डाटा को intentionally delete नहीं करते हैं| 

वही  जब पावर फैलियर होता है तो Temporary memory में डाटा तुरंत lost हो जाता है और वह computer के CPU के द्वारा automatically manage किया जाता है। Temporary memory को computer applications processes को run करने के लिए इस्तेमाल करते हैं| जब processes complete हो जाता है तो Temporary memory किसी दूसरे processes करने के लिए इस्तेमाल होने लग जाती है| इसका इस्तेमाल temporary files को store करने के लिए किया जाता है।

इसके अलावा कंप्यूटर मेमोरी को number of data containers में partitioned किया जाता है| जिन्हें memory cells कहते हैं| सभी cells specific amount of data को इंस्टॉल कर सकते हैं जिन्हें word कहा जाता है| इसके अलावा सभी cell में एक associated location identifier होता है| जिसे की address कहते हैं।

Data जिसे की binary form में अलग प्रकार के encoding schemes का इस्तेमाल करके process किया जाता है उन्हें coded कहा जाता है। कंप्यूटर में 0 और 1 की फॉर्म में binary digit होते हैं जिनको शॉर्ट में bits कहा जाता है।

कंप्यूटर की मेमोरी को determine करने के लिए उसमें दो चीजों का ध्यान रखा जाता है कि कितने number of bits per cell है और दूसरा number of cells कितने हैं| जिसमें मेमोरी को partitioned किया जाता है| उदाहरण के तौर पर कंप्यूटर मेमोरी डिपेंड करता है कि प्रत्येक cell में कितने bits stored है और कितने cells available है। कंप्यूटर इंडस्ट्री के हिसाब से sequence of 8-bits को byte कहा जाता है और यह बेसिक यूनिट ऑफ मेमोरी होती है।

Units for Measuring Memory (Data Storage) Capacity

  • 1 Bit = 1 Binary Digit
  • 4 Bits = 1 Nibble
  • 8 Bits = 1 Byte
  • 210= 1024 Bytes = 1 Kilobyte
  • 220 = 1024 Kilobyte = 1 Megabyte
  • 230= 1024 Megabyte = 1 Gigabyte
  • 240= 1024 Gigabyte = 1 Terabyte
  • 250= 1024 Terabyte = 1 Petabyte

डाटा के प्रकार

अगर हम डाटा टाइप की Programming की बात करें तो यह classification होता है जो यह specify करता है कि किस प्रकार की value एक variable के पास है और कौन से प्रकार के mathematical, relational या logical operations उनपर apply किए जा रहे हैं| जिनसे की उनमे किसी भी प्रकार की error नहीं होगी| उदाहरण के तौर पर string एक ऐसा डाटा टाइप है जिसका इस्तेमाल text को classify करने के लिए किया जाता है और वही integer एक ऐसा data type है जिसका इस्तमाल whole numbers को classify करने के लिए किया जाता है।

Data Typeकहाँ इस्तमाल होता हैउदाहरण
StringAlphanumeric charactershello world rohit kumar134
IntegerWhole numbers55 123 67890
Float (floating point)Number जिसमें की एक decimal point हो3.12 4.37 0.134
CharacterText को numerically Encoding encoding करने के लिए97 (in ASCII 97 is a lowercase ‘a’)
Booleanlogical values को represent करता हैTRUE/FALSE

संख्यात्मक (Numerical) Data

इस प्रकार के डाटा में decimal नंबर यानी कि 0 से 9 तक की संख्या का इस्तेमाल किया जाता है और कंप्यूटर में इस प्रकार के numerical data का ही ज्यादातर इस्तेमाल किया जाता है| यही वजह है कि Excel sheet में हम numerical data को ही डाटा के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।

Alphabetic Data

इस प्रकार के डाटा में हम (A-Z) तक के Alphabet का इस्तेमाल करते हैं।

Alphanumeric Data

इस प्रकार के डाटा में special character जैसे कि @, #, $ ऐसे डाटा का इस्तेमाल किया जाता है।

ऑडियो Data | ध्वनि (Audio data)

इस प्रकार के डाटा में Recording और सभी प्रकार के गाने शामिल होते हैं जो कि ऑडियो फॉर्मेट में होते हैं जैसे कि MP3, WAV इतियादी।

विडियो Data | चलचित्र (Video data)

इस प्रकार के डाटा में सभी प्रकार के वीडियो शामिल होते हैं जैसे कि MP4, MKV इत्यादि।

Graphical Data

इस प्रकार के डाटा में सभी प्रकार के Images, pictures, Graphical Data शामिल होते हैं| जो कि JPG, PNG format में इस्तेमाल किए जाते हैं।

डाटा के व्यवहार में फायदे

Solve Problems

अगर आप बिजनेस करते हैं और आप कोई प्रोडक्ट या सर्विस बेच रहे हैं और आपके उस प्रोडक्ट या सर्विस में किसी भी प्रकार की दिक्कत आ रही है तो आप के पास उस डाटा से संबंधित प्रोडक्ट या सर्विस से संबंधित लोगों के reviews है तो आप जान सकते हैं कि आपका वह प्रोडक्ट या सर्विस लोगों के लिए फायदेमंद हो रहा है या नहीं और आप उसके आधार पर अपने प्रोडक्ट में कुछ बदलाव भी कर सकते हैं।

Reach to Right Customer

अगर आप कोई बिजनेस कर रहे हैं और अपने business की मार्केटिंग को बढ़ाना चाहते हैं और अपने ग्राहकों तक पहुंचना चाहते हैं तो आप डाटा की मदद से ही यह जान सकते हैं कि कौन से ग्राहक आपका प्रोडक्ट को लेना चाहते हैं और वह ग्राहक किस लोकेशन से है और किस समय पर आपकी सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं| इस प्रकार के डाटा को analysis करने के बाद आप अपने मार्केटिंग को और भी अच्छे से कर सकते हैं।

Engagement in Social Media

आज के समय में लोग इंस्टाग्राम, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया और बहुत ज्यादा एक्टिव है| अगर आप अपना बिजनेस कर रहे हैं तो facebook page बनाकर या इंस्टाग्राम पर अकाउंट बनाकर अपने बिजनेस को promote कर सकते हैं और अपने business को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा सकते हैं| ऐसा करने से आपको सोशल मीडिया से भी काफी अच्छे users मिल सकते हैं जो आपकी services में इंटरेस्ट रखते हैं।

Data Processing क्या है?

Data Processing एक ऐसा सिस्टम या फिर एक ऐसा process है जिसमे raw data को meaningful information में process के जरिए convert किया जाता है| इसमें डाटा को इस हिसाब से manipulate किया जाता है कि raw data को meaningful बनाकर उससे results produce किया जा सके या फिर problem का situation improve किया जा सके| यह भी एक cycle की तरह ही है जिसमें raw data को एक process में input किया जाता है और जिससे output के तौर पर information और insights produce होते हैं।

Data Processing के Basic Stages

1.Input

इस step में Input डाटा को प्रोसेसिंग के लिए एक convenient form में prepare किया जाता है जो की मशीन के ऊपर निर्भर करता है| उदाहरण के तौर पर Input Data को इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर का इस्तेमाल करके magnetic disks, tapes या किसी और मीडियम में स्टोर किया जाता है।

2. Processing

इस step में input data को produce data में convert किया जाता है| उदाहरण के तौर पर जैसे कि किसी कंपनी के sales की summary को calculate करने के लिए उसके sales orders को देखा जाता है।

3. Output

इस step में पहले के प्रोसेस किए गए डाटा केresult को collect किया जाता है। उस Output डाटा के particular form को किस तरह से इस्तेमाल किया जाएगा उस पर निर्भर करती है| उदाहरण के तौर पर employees के pay-checks को भी Output डाटा कह सकते हैं।

चलिए अब Data Processing के Basic Stages को Details में समझते हैं

1. Input

Input phase में data को collect करके कंप्यूटर में store किया जाता है या फिर उस डाटा को पेपर पर लिख कर स्टोर किया जाता है।

a) Collection

किसी भी डाटा को इनपुट करने से पहले उस डाटा को कलेक्ट करना पड़ता है| उस डाटा को हम अलग-अलग sources से कलेक्ट कर सकते हैं| उदाहरण के तौर पर अगर आप जानना चाहते हैं कि आपके शहर में कितने स्कूल है तो आपको हर एक स्कूल में जाकर उनके डाटा को कलेक्ट करना होता है और वही अगर आप यह जानना चाहते हैं कि एक क्लास में 70% से ज्यादा marks वाले कितने student है तो आपको हर एक student की marksheet को collect करके इस इंफॉर्मेशन को निकालना होता है।

b) Verification

जब डाटा को इकट्ठा कर लिया जाता है तो उसे confirm करने के लिए Verification की जाती है| यह जानना भी जरुरी होता है कि जो data input के लिया गया है वह सही है या नहीं| जैसे हम result publish करने से पहले उसे वेरीफाई करते हैं या फिर किसी को रिपोर्ट देने से पहले एक बार वेरीफाई करते हैं।

c) Coding

अब इस स्टेप में डाटा को Coding किया जाता है| मतलब की कंप्यूटर उस डाटा को समझ सके| इसके लिए उस डाटा को Machine form में convert किया जाता है| जिससे कंप्यूटर इस इनपुट डाटा को आसानी से Process कर सके।

d) Storing

अब जो डाटा कंप्यूटर के excel या word में enter किया जाता है| उस डाटा को कंप्यूटर में स्टोर किया जाता है| इसके लिए किसी स्टोरेज डिवाइस का इस्तेमाल भी किया जा सकता है| जब यह डाटा कंप्यूटर में स्टोर हो जाता है तब उस डाटा को processing के लिए भेज दिया जाता है।

2. Processing

अब यह वह step है जहां डाटा को इंफॉर्मेशन बनाने के लिए प्रोसेस को शुरू किया जाता है| जिसके लिए Classification, Sorting, calculation, summarizing जैसी Techniques का इस्तेमाल किया जाता है।

a) Classification

इस प्रक्रिया में डाटा को अलग-अलग कैटेगरी में classify किया जाता है| जिससे उस डाटा को समझने में आसानी होती है| जैसे कि अगर आप किसी college में students के डाटा को ट्रांसफर करते हैं तब commerce category के डाटा को अलग रखा जाता है, science category के डाटा को अलग रखा जाता है, Art category के डाटा को अलग रखा जाता है जिससे Data Analysis करने में आसानी होती है।

b) Sorting

इस प्रक्रिया में डाटा को किसी ना किसी order में arrange करा जाता है ताकि उस डाटा को आसानी से access किया जा सके| आप डाटा को Ascending या Descending किस Sorting order में arrange करना चाहते हैं यह आप पर निर्भर करता है| जैसे कि Class में roll number को Alphabetical Order से sort करा जाता है और Marks को Highest mark से Lowest Mark में sort करा जाता है।

c) Calculation

इस प्रक्रिया में डाटा के ऊपर कोई ना कोई arithmetic Operation को Perform किया जाता है| यह arithmetic Operation जैसे कि sum, average, percentage कुछ भी हो सकते हैं| उदाहरण के तौर पर एक students के average marks कितने हैं, class में male और female ratio कितनी है, यह सब कुछ calculation Steps में आते हैं| इसके जरिए ही सही summarized information मिलती है।

d) Summarizing

जब Input data के ऊपर सारे ऑपरेशन परफॉर्म कर दिए जाते हैं| तब उसके बाद एक summarized Report को Produce किया जाता है क्योंकि किसी भी कंपनी में मैनेजमेंट को कभी भी पूरी रिपोर्ट नहीं दी जाती है| उनको सिर्फ summary ही भेजी जाती है| यह इसलिए होता है क्योंकि उनके पास उसे पूरी रिपोर्ट को देखने का समय भी नहीं होता है| इससे समय की भी बचत होती है| 

उदाहरण के तौर पर जब डॉक्टर बहुत सारे test करवाने के बाद रिपोर्ट देता है तो वह आदमी को सिर्फ इतना ही बताता है कि उसे बीमारी क्या है? ठीक उसी तरह रिपोर्ट कार्ड में exam result की summary ही होती है।

3. Output

जब Processing के सारे Steps complete हो जाते हैं तब हमें Output में result मिलता है| जिसको हम जानकारी या इंफॉर्मेशन भी कह सकते हैं| Processing step का सिर्फ एक ही मकसद होता है कि user को स्टिक result provide किया जा सके और ज्यादातर समय में आउटपुट इंफॉर्मेशन को किसी न किसी Storage device में Store किया जाता है जैसे कि हार्ड डिस्क, pen drive, CD, DVD.
Output Result पर होने वाली गतिविधियां कुछ इस प्रकार है:-

a) Retrieval

आप future में Output result को किसी भी स्टोरेज डिवाइस से retrieve कर सकते हैं| उदाहरण के तौर पर एक student 6th semester में है| आप उसके किसी भी semester के marks कभी भी देख सकते हैं इस प्रक्रिया को Retrieval कहते हैं।

b) Conversion

आप output data को किसी भी फॉर्म में कन्वर्ट कर सकते हैं| हमें डाटा प्रोसेसिंग के बाद जब आउटपुट रिजल्ट मिलता है तो हम Graph, Flowchart, chart, Table, Diagram, Report. India का Population का GRAPH, Population growth chart, College Time table इन किसी भी फॉर्म में देख सकते हैं यह निर्भर करता है कि आपका डाटा किस प्रकार का है।

c) Communication

डाटा को processed करने के बाद जब आउटपुट निकलता है तो उसे इंफॉर्मेशन कहते हैं और जब आउटपुट रिजल्ट को शेयर करा जाता है तो इस प्रक्रिया को Communication कहते हैं| उदाहरण के तौर पर जैसे news paper में लिखी information शेयर करके लोगों तक आसानी से पहुंचाई जा सकती है| ठीक उसी तरह College Time table जिसको Peon Notice Board पर छपता है इससे वह जानकारी सारे student तक पहुंच जाती है।

Data Processing के Methods क्या है?

पूरे विश्व में डाटा की कोई भी कमी नहीं है| जब तक उस डाटा को ठीक तरीके से process नहीं किया जाता| वह Data किसी भी काम का नहीं होता है| उस Data को यानी कि उस raw data को usable information में convert करने के लिए कुछ methods का इस्तेमाल किया जाता है|

इस काम के लिए हम paper और pencil का उपयोग भी कर सकते हैं| परंतु आज के समय में हम जानते हैं कि data की quantity बहुत ज्यादा होती है| तो ऐसे में paper और pencil का इस्तेमाल करके उस डाटा को processed करना बहुत मुश्किल होता है तो ऐसे समय में हम कंप्यूटर का इस्तेमाल करके उस डाटा को processed कर सकते हैं| डाटा को कंप्यूटर की मदद से processed करने के लिए सबसे पहले उस डाटा को collect किया जाता है| फिर उसकी accuracy को चेक किया जाता है| उसके बाद ही उस डांटा को कंप्यूटर में enter किया जाता है| तो चलिए दोस्तों अब हम आपको डाटा प्रोसेसिंग के कुछ मेथड के बारे में बताते हैं।

a) Batch Processing

यह data processing का simplest form है| इसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब large volume of data उपलब्ध होता है और उन्हें एक ही जगह पर categories किया जाता है| उदाहरण के तौर पर अगर हम store की बात करें तो वहां पर batch-process की मदद से transactions को एक ही जगह में categorize किया जाता है| इंफॉर्मेशन को बदला ना जाए तब batch-process बहुत ही ज्यादा fast हो सकती है।

b) Real Time Processing

कुछ batch-processing इतने भी ज्यादा फास्ट नहीं होते हैं| जब डाटा को instant turn-around time की जरूरत होती है| तब Real Time Processing method का इस्तेमाल करके डाटा को handle किया जाता है| उदाहरण के तौर पर जब कोई व्यक्ति airline ticket बुक करता है और फिर उसे cancel कर देता है| तब airline को अपने रिकॉर्ड को उसी समय अपडेट करना होता है| इस process से records instantly update हो जाते हैं| परंतु batch-processing में बहुत सारे डेटा को एक specified time में process करना होता है| इसीलिए real-time processing एक continuous process होता है।

c) Data Mining

Data Mining के लिए डाटा को अलग-अलग sources से collect किया जाता है और उन्हें combine कर correlations तलाश किया जाता है| उदाहरण के तौर पर grocery chain में customer के purchase को analyze किया जाता है| मान लीजिए वह हर बार चावल लेने के बाद दही भी खरीदता है तो इस इंफॉर्मेशन का इस्तेमाल करके grocery की sales को increase किया जा सकता है| इसलिए sales को बढ़ाने के लिए joint purchases का होना बहुत ही अच्छा साबित हो सकता है| 

d) Statistical Processing

Statistical Processing में heavy number-crunching होती है| ऐसा उन कंपनियों में होता है जिन को मालूम होता है कि सप्ताह में एक या दो दिन उनके ऐसे होते हैं जब वह बहुत ज्यादा busy होते हैं| ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कस्टमर आखिरी वक्त में ही अपनी request देता है| इसलिए कंपनी को इस प्रकार की प्रॉब्लम का सामना करना पड़ता है| जब कंपनी को अपनी प्रॉब्लम का कारण पता होता है तो कंपनी ऐसे प्रॉब्लम से आसानी से निपट सकते हैं| वह Statistics की मदद से डाटा को कंपेयर कर सकते हैं| फिर वह चाहे कंपनी अलग-अलग साइज की हो या फिर अलग-अलग शहर से ही क्यों ना हो।

Data और Information में अंतर क्या है?

COMPARISON का BASISDATAINFORMATION
MeaningData raw facts होते हैं ये facts पूरी तरह से uncategorized होते हैं ऐसे facts का कुछ उद्देश्य ही नहीं होता है|ऐसे Facts जिन्हें की processing करने के बाद इस्तमाल में लाया जाता है ऐसे processed data को information कहते हैं|
ये क्या हैये केवल text और numbers होते हैं|ये refined data होता है|
किसके ऊपर Based होता हैRecords और ObservationsAnalysis
FormUnorganized होते हैं|Organized होते हैं|
Usefulये कभी उपयोगी होता है तो कभी नहीं भी|हमेशा उपयोगी होता है|
SpecificNoYes
Dependencyये information के ऊपर निर्भर नहीं होता है|बिना data के information को process नहीं किया जाता है|

Data Management क्यों जरूरी है?

आज के समय में किसी भी company, organization के लिए डाटा सबसे ज्यादा जरूरी होता है क्योंकि उसी डाटा के आधार पर ही कोई भी कंपनी decision ले सकती है| अगर कंपनी के पास accurate, complete और organized डाटा मौजूद है तो उस कंपनी की तरक्की में डाटा बहुत महत्वपूर्ण रोल निभा सकता है। आज के समय में किसी भी कंपनी के द्वारा डाटा collect करने का काम बहुत ही उच्च स्तर पर किया जाता है| इसलिए इतने बड़े डाटा को आप manually processed नहीं कर सकते हैं| ऐसे डाटा को कंपनियों के द्वारा डाटा मैनेजमेंट सिस्टम के द्वारा ही processed किया जाता है।

Data Management के फायदे

  • सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे कंपनी की productivity बढ़ जाती है। 
  • इसमें कंपनी के लिए security काफी हद तक कम हो जाती हैं। 
  • इससे किसी भी कंपनी को decision लेना आसान हो जाता है। 
  • इससे कंपनी के लिए काम करने आसान हो जाते हैं। 
  • इससे कंपनी के डाटा lost होने का खतरा भी नहीं रहता है।

Conclusion

अब आप जान चुके हैं कि Data क्या है, Data के प्रकार कितने हैं, Database क्या है, डाटा प्रोसेसिंग क्या है, डाटा प्रोसेसिंग के बेसिक स्ट्रेटजी क्या है, डाटा और इंफॉर्मेशन में अंतर क्या है| उम्मीद करते हैं कि हमारे द्वारा शेयर करी गई जानकारी को पढ़ने के बाद डाटा से संबंधित आपके सारे डाउट clear हो गए होंगे। अगर हमारे द्वारा शेयर करी गई जानकारी से संबंधित आपको कोई भी डाउट है या फिर आप हमें कोई राय देना चाहते हैं तो नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं।

ये भी पढ़े:

FAQ (Frequently Asked Questions)

Memory data वापिस कैसे लेना है?

अगर आपके memory card से डाटा delete हो गया है तो उसके लिए आपको सबसे पहले अपने कंप्यूटर सिस्टम में recovery software को install करना होगा| फिर आपको अपने मोबाइल से memory card को निकालकर कंप्यूटर के साथ कनेक्ट करना होगा और उस सॉफ्टवेयर को run करना होगा| Run करने के बाद आपका डिलीट हुआ डाटा आपको दोबारा प्राप्त हो जाएगा।

MS Dose में Save किए हुए डाटा को Edit करने का Command क्या होगा?

अगर आपको लगता है कि आप ने MS Dos File में कुछ ऐसा लिखा है जिसको आप edit करना चाहते हैं तो उसके लिए सबसे पहले आपको उस डॉक्यूमेंट को ओपन करना होगा| ओपन करते ही आपको edit का ऑप्शन दिखाई देगा जिस पर click करने के बाद आप उसे save कर सकते हैं।

डिस्प्ले खराब हुआ मोबाइल का डाटा कैसे निकाले या लैपटॉप से कैसे कनेक्ट करें?

अगर आपके मोबाइल का डिस्प्ले खराब हो गया है और आप उस डाटा को निकालना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको उस डाटा को सिस्टम के साथ कनेक्ट करना होगा और उसके बाद आपको डाटा रिकवरी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके उस डाटा को रिकवरी पर लगाना होगा।

District Data Assistant का Work क्या होता है?

District level में जो भी टेक्निकल काम होता है या फिर ऑफिशियल काम जिससे कंप्यूटर का इस्तेमाल करके वह assistant करते हैं| साथ में अगर कोई excel के काम, कोई graphs बनाना यहां तक कि official data को categorize करने का काम भी assistant के द्वारा ही किया जाता है।

Data SD card में कैसे save Karen?

क्योंकि हम जानते हैं कि फोन की मेमोरी बहुत कम होती है इसलिए user अक्सर ही अपने डाटा को सेव करने के लिए external SD card का इस्तेमाल करता है और उस मैटर को अपने फोन से SD card में ट्रांसफर करके उस डाटा को save कर सकता है| इसके अलावा google play store में भी बहुत सारी ऐसी apps है जिसका इस्तेमाल करके वह अपने डाटा को SD card में ट्रांसफर कर सकता है।

कंप्यूटर के किस भाग से डाटा इनपुट किया जाता है?

कंप्यूटर में अगर डाटा इनपुट करना है तो कंप्यूटर के इनपुट डिवाइस का इस्तेमाल करके उस डाटा को कंप्यूटर में डाल सकते हैं| जैसे कि आप keyboard, mouse, OCR, OMR, pen drive या CD का इस्तेमाल करके उस डाटा को कंप्यूटर में डाल सकते हैं।

MS Word में डाटा कैसे Insert करें?

डाटा को MS Word में Insert करने के लिए आप insert menu का इस्तेमाल कर सकते हैं| इसके अलावा अगर आप चाहे तो YouTube से वीडियो देखकर भी MS Word में डाटा Insert करना सीख सकते हैं।

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