भारत में मई में घूमने की जगह | Best Tourist Places to Visit in May in India in Hindi

भारत में मई का महीना ऐसा समय होता है जो पूरे देश में साल के सबसे गर्म महीनों में से एक होता है। साल के इस महीने में लगभग सभी लोग गर्मी से परेशान होकर कहीं घूमने जाने का प्लान बनाते हैं। मई के महीने के दौरान लगभग सभी स्कूल और कॉलेज की छुट्टी होती है। विशेष रुप से मई का महीना भारत में हिल स्टेशन घूमने का एक अच्छा समय माना जाता है, जहां पहाड़ और वादियों से आ रही ठंडी हवाएं आपको अलग ही सुखद एहसास देती हैं।

आप सोच रहे होंगे कि हिल स्टेशन तो बहुत हैं, ऐसे और कौनसी पहाड़ी जगह है, जहां हम मई के महीने में अकेले, दोस्तों व परिवार वालों के साथ जा सकते हैं। इस साल की गर्मियां भी लगभग शुरू हो चुकीं हैं।

अब गर्मी बढ़ते बढ़ते मई के महीने में काफी ज्यादा हो जायेगी जिसकी वजह से बहुत से लोग भारत में मई में घूमने की ठंडी जगह की खोज में लग जाते हैं। अगर आप भी मई के महीने में किसी ठंडे स्थान की यात्रा करना चाहते हैं तो इस लेख को पूरा जरूर पढ़े क्योंकि हम आपको भारत में मई में घूमने की 20 जगह के बारे में बताने जा रहे हैं।

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तवांग – Tawang

तवांग अरुणाचल प्रदेश राज्य का हिस्सा है। मन को खुश कर देने वाला अरुणाचल प्रदेश के तवांग शहर 2669 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। हिमालय की चोटी इस जगह को और भी आकर्षक बना देती है। यहां के पुराने बौद्ध मठ पर्यटन का प्रमुख आकर्षण है और दलाई लामा का जन्म इसी प्रसिद्ध शहर तवांग में हुआ। तवांग का खूबसूरत शहर, जिसे दवांग के नाम से भी जाना जाता है, में आपकी यात्रा को यादगार बनाने के लिए कई जगह है।

मई में घूमने के लिए तवांग बहुत ही आकर्षक जगह है। यहां आपको घूमने के लिए सेला पास, तवांग मठ, नूरानंग फॉल्स, माधुरी झील, तवांग युद्ध स्मारक, गौरीचैन पीक, पेंग टेंग त्सो झील देखने को मिलेंगी। अगर आप अपने शहर की। भीषण गर्मी से परेशान हो चुके हैं और मई के महीने में घूमने की कोई अच्छी जगह तलाश कर रहे हैं तो आपको तवांग की यात्रा पर जरूर जाना चाहिए। तवांग राज्य का एक बहुत ही खूबसूरत और ठंडा शहर है।जहां पर मई के महीने में तापमान 5°C से 21°C के बीच रहता है।

तवांग कैसे पहुंचे – How to Reach Tawang

तवांग में बस या रेल में पहुंचने के लिए सबसे नजदीक जगह तेजपुर है। तेजपुर रेलवे ट्रैक और रोड से अच्छे से जुड़ा हुआ है।  गुवाहाटी हवाई अड्डा तवांग शहर जाने के लिए निकटम हवाई अड्डा है जो तवांग से 520 कि.मी दूर है और देश के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। स्टेशन, बस स्टैंड या हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद आप बाहर से टैक्सी या  अरुणाचल के लोकल ट्रांसपोर्ट से तवांग पहुंच सकते हैं।

पंचमढ़ी – Pachmarhi

मध्य प्रदेश का एक मात्र हिल स्टेशन पंचमढ़ी है और पर्यटकों के बीच लोकप्रिय पर्यटन स्थल पंचमढ़ी यहां की प्राकृतिक खूबसूरती पर्यटकों का मन मोह लेती है। दूर दूर तक फैली हुई पर्वतीय घाटियां कल कल करके बहते झरने और आध्यात्मिक पर्यटन स्थल ही पंचमढ़ी की खास पहचान है। सतपुड़ा नदी के बीच बसे इस स्थान को सतपुड़ा की रानी भी कहा जाता है।

लहलहाते झरने, जलप्रपात, नदियां, तलब चारो तरफ से जंगलों से घिरा हुआ यह पंचमढ़ी पर्यटन मानो प्रकृति की गोद में समाए हुआ है। यहां पर आपको धूपगढ़, बी-फाल, अफसरा फाल, सिल्वर फाल, लिटिल फाल, हांडी खोह, प्रियदर्शनी पॉइंट चोरागढ़ मंदिर, महादेव मंदिर, गुप्त मंदिर, जटाशंकर मंदिर, पांडव गुफाएं देखने लायक जगह है।

पंचमढ़ी कैसे पहुंचे – How to Reach Pachmarhi

पंचमढ़ी आप  रोड से आसानी से जा सकते हैं। पंचमढ़ी जाने के लिए नजदीकी बस अड्डा और रेलवे स्टेशन पिपरिया है। यदि आप हवाई यात्रा करना चाहते हैं तो सबसे नजदीकी हवाई अड्डा राज भोज हवाई अड्डा है जो जबलपुर में है।

धर्मशाला – Dharmshala

धर्मशाला हिमाचल प्रदेश का एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन है जहां पर्यटक गर्मियों के मौसम में आते हैं क्योंकि हम सबको पता है कि हिमाचल सर्दियों में बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है और गर्मियों में भी यहां का मौसम ठंडा ही रहता है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को अपनी और खींच लेती है। धर्मशाला को न सिर्फ भारतवासी बेहद पसंद करते हैं, बलकि विदेशों से भी लोग यहां घूमे बिना वापिस नही जाते।

धर्मशाला को मिनी तिब्बत के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहां तिब्बती लोग रहते हैं। धर्मशाला में लहराते हुए तिब्बती झंडे सड़कों व बाजारों की रौनक को बड़ा देते हैं। चहल पहल से भरा बाजार, म्यूजियम और मोनेस्ट्री जैसी चीजें धर्मशाला में और समय बिताने को मजबूर कर सकती हैं। यहां देखने लायक जगह में डल झील, त्रिउंड झील, नामग्याल मठ, ज्वालामुखी देवी मंदिर, कांगड़ा आर्ट संग्रालय,मसरूर रॉक कट मंदिर, क्रिकेट स्टेडियम, युद्ध स्मारक, भाग्सू झरना, दलाई लामा मंदिर, कांगड़ा किला है।

धर्मशाला कैसे पहुंचे – How to Reach Dharmshala

धर्मशाला जाने के लिए दिल्ली, शिमला और देहरादून से बसें चलती हैं। धर्मशाला के सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पठानकोट है। गग्गल हवाई अड्डा शहर के केंद्र से लगभग 15 किमी दूर, धर्मशाला की सेवा करने वाला मुख्य घरेलू हवाई अड्डा है।

ऊटी – Ooty

दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में खूबसूरत नीलगिरी पहाड़ियों में बसा ऊटी एक बेहद ही खूबसूरत और प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। समुद्र तल से लगभग 2240 मीटर की ऊंचाई पर बसा ऊटी हमेशा से ही पर्यटकों का सबसे पसंदीदा जगह रहा है। ऊटी प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है जिसकी सुंदरता वास्तव में अद्भुत है। दूर दूर तक फैले घास के मैदान, हरी भरी घाटियां, लहरदार पहाड़ियां और कई खूबसूरत झीलों के साथ ऊटी एक असाधारण दृश्य प्रस्तुत करता है, जिसे देखने के बाद लगभग सभी पर्यटक संपूर्ण रूप से मोहित हो जाते हैं।

ऊटी का स्थानीय नाम उधगमंडलम है जिसका अर्थ होता है पहाड़ पर बसा गांव। अक्सर पहाड़ों की रानी कहे जाने वाला ऊटी न केवल तमिलनाडु और भारत का प्रसिद्ध हिल स्टेशन है बल्कि पूरे विश्व में सबसे उच्च पर्यटन सूची में शामिल है। यहां देखने लायक जगह में ऊटी झील, नीलगिरी माउंटेन रेलवे, बोटैनिकल गार्डन, अवलांचे झील, मुरुगन मंदिर, डॉल्फिंस नोज, डियर पार्क, एमराल्ड झील, रोज गार्डन, पाइकारा झरना, डोड्डाबेटा शिखर, कोटागिरी हिल, कामराज सागर डैम,मुदुमलाई राष्ट्रीय उद्यान, कलहट्टी जलप्रपात, कैथरीन फाल्स है

ऊटी कैसे पहुंचे – How to Reach Ooty

ऊटी सड़क मार्गों से जुड़ा हुआ है। इसीलिए बस से भी ऊटी पहुंचा जा सकता है। यहां लोकल ट्रांसपोर्ट सिटी बस, टैक्सी या फिर ऑटोरिक्शा की अच्छी सेवा उपलब्ध है। सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन मेट्टुपालयम  रेलवे स्टेशन है।ऊटी का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा कोयंबटूर हवाई अड्डा है जो ऊटी से लगभग 85 किमी की दूरी पर स्थित है

गुलमर्ग – Gulmarg

गुलमर्ग हिल स्टेशन भारत के जम्मू कश्मीर के बारामुला जिले में स्थित है। दोस्तों यह हिल स्टेशन इतना सुंदर है कि इसे धरती का स्वर्ग भी कहा जाता है। मई के महीने में घूमने के लिए गुलमर्ग बेहतरीन स्थान है। यहां चारों तरफ बर्फ से ढंके हुए ऊंचे हिमालय, फूलों की घास, गहरी खाइओं, सदाबहार वनों की घाटियों से घिरा, गुलमर्ग किसी का भी मन मोह लेता है।

गुलमर्ग हिल स्टेशन की समुद्र तल से ऊंचाई 2730 मीटर है। गुलमर्ग को साहसिक केंद्र के रूप में भी विकसित किया गया है क्योंकि भारतीय स्कीइंग संस्थान और पर्वतारोहण यहां स्थित हैं। गुलमर्ग आपको फूलों से ही ही ढका हुआ दिखाई देगा। गुलमर्ग में देखने लायक जगह में अफरवात पीक, सात झरने, गुलमर्ग बायोस्फियर रिजर्व, स्ट्रॉबेरी फील्ड गुलमर्ग में ताजा स्ट्रॉबेरी, गुलमर्ग गोल्फ कोर्स, चिल्ड्रन पार्क, खिलनमर्ग, महारानी मंदिर, कंचनजंगा संग्रहालय हैं।

गुलमर्ग कैसे पहुंचे – How to Reach Gulmarg

गुलमर्ग पहुंचने के लिए सबसे अच्छा रास्ता है सड़क मार्ग। गुलमर्ग से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन जम्मू है। गुलमर्ग का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा श्रीनगर है जो गुलमर्ग से 56 किमी की दूरी पर स्थित है।

कलिम्पोंग – Kalimpong

बर्फ से ढकी चोटियों वाला यह स्थान, भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में एक सुंदर से हिल स्टेशन पर क्षितिज पर स्थित है। कलिम्पोंग पर्यटन का सबसे बड़ा तथ्य यह है कि यह राजसी हिल स्टेशन समुद्र तल से 4000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यहां ताजा शुद्ध हवा चलती है जो आने वाले हर पर्यटक की छुट्टियों को शानदार बना देती है और यह पर्यटक बार बार आना चाहते है।प्राचीन बौद्ध मठों, सदियों पुराने चर्चों और उत्तम श्रध्देय मंदिरों के साथ कलिम्पोंग भारत के टॉप पर्यटक स्थल में से एक है जो हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है।

कलिम्पोंग में देखने लायक जगह में डरपिन दारा हिल, थारपा चोलिंग मठ, मार्गन हाउस, फूल नर्सरी, देओलो हिल, ज़ोग डाॅग पालरीफ़ाॅ ब्रोंग मठ, थोंगसा गोम्पा, मंगल धाम मंदिर, मैकफारलेन मेमोरियल चर्च, नीरा वैली नेशनल पार्क, नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर, क्राॅकिटी, शहीद पार्क, जेलेप्ला व्यूपाॅइंट, सेंट टेरेसा कैथोलिक चर्च, लेप्चा म्यूजियम, ऋषि बंकिम चंद्र पार्क, आर्ट कैफे हैं। आप कलिम्पोंग में रिवर राफ्टिंग और ट्रैकिंग भी कर सकते हैं।

कलिम्पोंग कैसे पहुंचे – How to Reach Kalimpong

आप फ्लाइट, रेलवे और रोड में से किसी से भी ट्रैवल कर सकते हैं। कलिम्पोंग राज्य के विभिन्न शहरों से सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। गंगटोक और सिलीगुड़ी जैसे शहरों से कलिम्पोंग के लिए नियमित बसें हैं। कलिम्पोंग से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुड़ी है। कलिम्पोंग का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा बागडोगरा हवाई अड्डा है जो सिलिगुड़ी में है।  जो कलिम्पोंग से लगभग 78 किमी की दूरी पर स्थित है।

शिलांग – Shillong

शिलांग भारत में मई के महीने में घूमने के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थानों में से एक है। समुद्र तल से 1491 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद शिलांग मेघालय की राजधानी है और एक फेमस हिल स्टेशन भी है। ये देश का एक ऐसा पहला हिल स्टेशन है, जहां चारों तरफ से पहुंच सकते हैं। शिलांग का नाम U-Shyllong देवता के नाम पर रखा गया है।

शिलांग अपनी खूबसूरती की वजह से स्कॉटलैंड से कम नही है। शिलांग में घूमने लायक जगह में उमियाम झील, हाथी झरना, शिलांग पीक, डेविड स्कॉट ट्रेल, डॉन बॉस्को संग्रहालय, लेडी हैदरी पार्क, पुलिस बाजार, वार्ड्स झील हैं। शिलांग की पर्यटन स्थल मेघालय के प्रवेश द्वार के रूप में भी कार्य करता है, जो भरी बारिश, गुफाओं, सबसे ऊंचे झरनों, सुंदर परिदृश्य और अद्भुत लोगों और संस्कृति के लिए प्रसिद्ध राज्य है।

शिलांग कैसे पहुंचे – How to Reach Shillong

कई बसें और टैक्सी यात्रियों को गुवाहाटी से शिलांग तक ले जाती हैं। मेघालय राष्ट्रीय राजमार्ग के माध्यम से असम में सिलचर, मिजोरम में आईजोल और त्रिपुरा में। अगरतला से भी जुड़ा हुआ है। शिलांग से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन गुवाहाटी है। शिलांग से सबसे नजदीकी हवाई अड्डा उमरोई हवाई अड्डा है जो शिलांग से 30 किमी की दूरी पर स्थित है।

मुन्नार – Munnar

मुन्नार, केरल में स्थित है जो एक शांत और मनोरम हिल स्टेशन है। मुन्नार के आस पास ऐसे बहुत से दिलचस्प स्थान हैं जहां आप यात्रा कर सकते हैं। यदि आप प्रकृति प्रेमी हैं तो आप इको प्वाइंट, एरविकुलम नेशनल पार्क और कुंडला झील जैसी विशेष जगहों पर जा सकते हैं। इसके अलावा यहां संस्कृति के शौकीनों के लिए भी काफी अच्छी है। मुन्नार के नजदीक मरायूर में दा डोलमेन और रॉक पेंटिंग्स और टी म्यूजियम है जो शहर के सबसे बड़े टी एस्टेट में से एक है, एतिहासिक और सांस्कृतिक जानकारी के लिए ये सबसे अच्छा स्थान है।

मुन्नार में घूमने लायक जगह में इको पॉइंट, अट्टूकड़ झरना, रोज गार्डन, ऐराविकुलम नेशनल पार्क, मरायूर डॉलमेंस, टी म्यूजियम नीलकुरिंजी, अनामुडी पीक, लक्कम वाटरफॉल, पुनर्जन्नी ट्रेडिशनल पार्क, पावर हाउस फॉल्स, कुंडाला डैम एंड लेक, ट्रैकिंग के लिए लॉक हार्ट गैप, इंडो स्विस डेरी फार्म हैं।

मुन्नार कैसे पहुंचे – How to Reach Munnar

मुन्नार सड़क मार्ग से केरल राज्य के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। मुन्नार से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन अलुवा रेलवे स्टेशन है। मुन्नार से सबसे नजदीकी हवाई अड्डा कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है। जो मुन्नार से लगभग 110 किमी की दूरी पर स्थित है।

शिमला –  Shimla

शिमला उत्तर भारत के सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशन में से एक है जो हिमाचल प्रदेश की राजधानी है। शिमला अपने माल रोड, रिज, टॉय ट्रेन और औपनिवेशिक वास्तुकला के लिए पूरे देश में जाना जाता है। 2200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित शिमला देश के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों में से एक है जो हनीमूनर्स के लिए काफी प्रसिद्ध है।

ब्रिटिश भारत की पूर्ववर्ती ग्रीष्मकालीन राजधानी से प्रसिद्ध यह शहर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वातावरण की वजह से किसी भी पर्यटक को दोबारा यहां आने पर मजबूर कर देगा। शिमला के ऐतिहासिक मंदिर के साथ-साथ यहां की औपनिवेशिक शैली की इमारतें दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों को अपने आकर्षण से मंत्रमुग्ध कर देती है। अगर आप शिमला हिल्स स्टेशन घूमने के लिए आ रहे हैं तो आपको इस शहर में माल रोड, रिज, इंस्टीट्यूट आफ एडवांस स्टडीज और जाखू मंदिर जरूर घूमने के लिए जाना चाहिए।

कालका से शिमला के लिए चलने वाली टॉय ट्रेन यहां की कई खूबसूरत पहाड़ियों और घाटियों से होकर गुजरती है जिसमें यात्रा करना आपके लिए बेहद यादगार साबित हो सकता है। इस रेलमार्ग को दुनिया के सबसे खूबसूरत ट्रेन मार्गो में से एक कहा जाता है। शिमला में घूमने लायक जगह में द रिज, कुफरी शिमला, माल रोड, क्राइस्ट चर्च, समर हिल, चैल हिल, अर्की किला, नालदेहरा, शिमला राज्य संग्रहालय, दारा घाटी अभयारण्य हैं।

शिमला कैसे पहुंचे – How to Reach Shimla

उत्तर भारत के प्रमुख शहरों से हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के अलावा कई निजी बसें भी चलती हैं। शिमला से सबसे नजदीकी  रेलवे स्टेशन कालका रेलवे स्टेशन है जो नियमित ट्रेनों द्वारा चंडीगढ़ और दिल्ली से जुड़ा हुआ है। शिमला से सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जुब्बड़हट्टी हवाई अड्डा है जो शिमला से 23 किमी की दूरी पर स्थित है।

मनाली – Manali

हिमाचल प्रदेश में शिमला हिल स्टेशन से 235 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मनाली भारत के सबसे पॉपुलर टूरिस्ट प्लेस में से एक है जो कुल्लू जिला में पड़ता है। मनाली जितना खूबसूरत है उतना ही शानदार इसका सफर भी है। मनाली का जिक्र होते ही दिल और दिमाग में एक ऐसी पिक्चर बनती है जहां बर्फ से ढंके पहाड़ है तेज जलधारा के साथ चट्टानों से बहती हुई व्यास नदी है और मन को छू लेने वाली वादियां है। वाकई में मनाली का नजारा कुछ ऐसा ही है जैसे फिल्मों में और फोटो में दर्शाया जाता है| इसलिए हर मनुष्य को जीवन में एक बार मनाली की ट्रिप पर जरूर जाना चाहिए।

मनाली में देखने लायक जगह में रोहतांग पास, सोलंग वैली, पार्वती वैली, पैराग्लाइडिंग, हॉट एयर बैलून, रिवर राफ्टिंग, हिडिम्बा देवी मंदिर, अटल टनल, जोगिनी वाटरफॉल, अंजनी महादेव मंदिर, सेथन गांव, मनु टेम्पल, बरोद पार्शा वाटरफॉल, क्लब हाउस, मणिकरण गुरुद्वारा, माल रोड, मढ़ी, हिम वैली फन सिटी, वैष्णो देवी मंदिर और मलाना गांव हैं।

मनाली कैसे पहुंचे – How to Reach Manali

मनाली भारत के सभी प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बैंगलोर, हैदराबाद इत्यादि से बस सर्विस द्वारा जुड़ा हुआ है। मनाली से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन जोगिंदर नगर है। मनाली से सबसे नजदीकी हवाई अड्डा भंतूर हवाई अड्डा है जो मनाली से 50 किमी की दूरी पर स्थित है।

रानीखेत – Ranikhet

रानीखेत उत्तराखंड राज्य का एक प्रसिद्ध शहर के साथ साथ एक हिल स्टेशन भी है। रानीखेत जाने के बाद आप वहां की प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण, देवदार के ऊंचे पेड़, हिमालय की ऊंची चोटियां और बहुत सारे एडवेंचर एक्टिविटी के मजे ले सकते हैं। रानीखेत एक ऐसा हिल स्टेशन है जिसको ब्रिटिश राज के दौरान विकसित किया गया था। रानीखेत की जलवायु बेहद शांत है और प्रदूषण तो यहां बिल्कुल भी नही है।

रानीखेत हर साल भारी संख्या में देश भर के पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। यहां से आप हिमालय पर्वत श्रृंखला के दूर का दृश्य प्राप्त कर सकते हैं। मई के महीने में रानीखेत का तापमान 8°C से 22°C के बीच होता है। रानीखेत में देखने लायक जगह में चौबटिया गार्डन, गोल्फ ग्राउंड, रानी झील, एडवेंचर पार्क, झूला देवी मंदिर, कुमाऊॅं रेजिमेंटल सेंटर, स्वर्गाश्रम बिन्सर महादेव मंदिर, भालू बांध, आशियाना पार्क और कालिका देवी मंदिर हैं।

रानीखेत कैसे पहुंचे – How to Reach Ranikhet

रानीखेत उत्तराखंड राज्य के प्रमुख शहरों और कस्बों से सड़कों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। अल्मोड़ा, नैनीताल, काठगोदाम से रानीखेत के लिए बसें और टैक्सी आसानी से उपलब्ध हैं। रानीखेत से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है। रानीखेत से सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पंतनगर है जो रानीखेत से 115 किमी की दूरी पर स्थित है।

दार्जिलिंग – Darjeeling

समुद्र तल से लगभग 2134 मीटर की ऊंचाई पर कंचनजंगा पर्वत श्रेणी की गोद में बसा दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल का एक खूबसूरत शहर है। दार्जिलिंग भारत में मई के महीने में घूमने के लिए एक आदर्श पर्यटन स्थल है। दार्जिलिंग शब्द का अर्थ दोर्जे (बज्र) और लिंग, जिसका अर्थ होता है “बज्र का स्थान”।

दार्जिलिंग अपने मनमोहक वातावरण हरी-भरी पहाड़ियां और चाय के बगांनो के लिए दुनिया भर में मशहूर है। दार्जिलिंग ब्रिटिश शासन काल से एक खूबसूरत पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता रहा है। दार्जिलिंग में घूमने लायक जगह में टाइगर हिल, बत्तस्या लूप, घूम मोनेस्ट्री, रॉक गार्डन, गंगा मैया पार्क, ऑब्जर्वेटरी हिल, जैपनीज टेम्पल, दार्जिलिंग रोपवे, हैप्पी टी वैली, सिंगलीला नेशनल पार्क, हिमालयन रेलवे और नाइटिंगेल पार्क हैं।

दार्जिलिंग कैसे पहुंचे – How to Reach Darjeeling

दार्जिलिंग सिलीगुड़ी, न्यू जलपाईगुड़ी, बागडोगरा , गंगटोक आदि शहरों से जुड़ा हुआ है। दार्जिलिंग से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुड़ी है। दार्जिलिंग से सबसे नजदीकी हवाई अड्डा बागडोगरा है जो दार्जिलिंग से 88 किमी पर स्थित है।

मसूरी – Mussoorie

उत्तर पुर्वीय भारत में घूमने के लिए एक से एक शानदार जगहें हैं इन्हीं में से एक है मसूरी। बता दें कि मसूरी को पहाड़ों की रानी भी कहा जाता है। इसी बात से आप मसूरी की खूबसूरती का अंदाजा भी लगा सकते हैं। मसूरी ऐसी जगह है जो हमेशा अपने चारों ओर हरियाली की चादर ओढ़े रहती है। इस शहर को गंगोत्री और यमनोत्री का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। मई के महीने में मसूरी का तापमान 12°C से 27°C के बीच रहता है।

मसूरी में घूमने लायक जगह में गनहिल, केम्प्टी फाल, क्लाउड एंड, लाल टिब्बा, ज्वाला मंदिर, मसूरी झील, नाग टिब्बा, धनौल्टी, झड़ीपानी झील, कैमल बैक रोड, वन चेतना केंद्र, म्युनिसिपल गार्डन, भट्टा फाल, सर जॉर्ज एवरेस्ट हाउस, लंढोर बाजार, तिब्बती मंदिर, द मॉल, बेनोग वन्यजीव अभयारण्य और संतला देवी मंदिर हैं।

मसूरी कैसे पहुंचे – How to Reach Mussoorie

बस के द्वारा भी मसूरी पहुंचा जा सकता है। यहां सरकारी बसें और निजी बसें भी चलती है। दिल्ली और नैनीताल से बस का सफर नजदीक एवं पास का रहता है। मसूरी से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन देहरादून है। मसूरी से सबसे नजदीकी हवाई अड्डा देहरादून का जोली हवाई अड्डा है।

डलहौजी – Dalhousie

डलहौजी हिमाचल प्रदेश का एक छोटा सा शहर है, जो यहां आने वाले पर्यटकों के लिए स्वर्ग के समान माना जाता है। डलहौजी अपने प्राकृतिक नजारों, फूलों, घास के मैदान, तेज प्रवाह वाली नदियों, शानदार धुंध के पहाड़ों से घिरा हुआ है। हनीमून मनाने के लिए डलहौजी हिमाचल की सबसे अच्छी जगहों में से एक माना जाता है।

डलहौजी भारत के सबसे ठंडे स्थानों में से एक है जिसकी वजह से आप गर्मियों के मौसम में भी इस शहर की यात्रा कर सकते हैं। मई के मौसम में डलहौजी का तापमान 15°C से 30°C के बीच रहता है। डलहौजी में घूमने लायक जगह में खाज्जिअर, दैनकुंड पीक, पंचपुला, कलातोप वन्यजीव संरक्षण, संत जॉन चर्च, चमेरा झील, गंजी पहाड़ी, सतधारा झरना, मॉल रोड, रंग महल, चामुंडा देवी मंदिर, बकरोटा हिल्स, सच पास और सुभाष बावली हैं।

डलहौजी कैसे पहुंचे – How to Reach Dalhousie

डलहौजी सड़क मार्ग की मदद से आसपास के प्रमुख शहरों और जगहों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य बस सेवा और लग्जरी कोच दलहोजी को आसपास की सभी प्रमुख जगहों और शहरों से जोड़ते हैं। दिल्ली से डलहौजी के लिए रात भर लग्जरी बसें भी उपलब्ध है। इस मार्ग पर टैक्सी और निजी वाहन भी मिल जाते हैं। डलहौजी से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पठानकोट है। डलहौजी से सबसे नजदीकी हवाई अड्डा गग्गल हवाई अड्डा है जो कांगड़ा में है और डलहौजी से 13 किमी की दूरी पर स्थित है।

मैकलोडगंज – Mcleodganj

हिमाचल प्रदेश राज्य में स्थित मैकलोडगंज शहर भारत के प्रमुख गिने-चुने हिल स्टेशनों में से एक माना जाता है। यह भारत में छुट्टियां मनाने और परिवार के साथ घूमने जाने के लिए एक आदर्श पर्यटन स्थल है। अगर आप एक प्रकृतिक प्रेमी हैं और एक शांत वातावरण को पसंद करते हैं तो बेशक मैकलोडगंज के लिए एक सही जगह है और शांति के लिए यहां स्थित कुछ बौद्ध मठ है जैसे नामग्पाल और त्सगालाखंग मठ जहां जाकर आपको एक अलग ही शांति का अनुभव प्राप्त होगा। मैकलोडगंज में घूमने लायक जगह में त्रिउंड ट्रैक, भागसूनाग झरना, दलाई लामा मंदिर, कांगड़ा किला, डल लेक, अघंजर मंदिर, नामग्पाल मठ और मिंकीयानी दर्रा हैं।

मैकलोडगंज कैसे पहुंचे – How to Reach Mcleodganj

मैकलोडगंज के लिए पंजाब और दिल्ली से डायरेक्ट बस चलती है जिससे आप यहां पहुंच सकते हैं। इसके अलावा मैकलोडगंज बस के माध्यम से देश के अन्य शहरों से भी बहुत अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। मैकलोडगंज से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पठानकोट है। मैकलोडगंज से सबसे नजदीकी हवाई अड्डा कांगड़ा हवाई अड्डा है जो मैकलोडगंज से 21 किमी की दूरी पर स्थित है।

गंगटोक – Gangtok

गंगटोक सिक्किम राज्य का सबसे बड़ा शहर है। गंगटोक घूमने के लिहाज से बेहद ही आकर्षक, प्राकृतिक और बादलों से घिरी हुई ऐसी जगह है जो आने वाले हर पर्यटक को तरोताजा कर सकती है। गंगटोक हिमालय पर्वत माला पर शिवालिक पहाड़ियों के ऊपर 1437 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। गंगटोक में प्राकृतिक सुंदरता से जुड़ी कई जगह हैं जिनमें से कुछ मुख्य आकर्षण जैसे त्सोमो झील, बान झाकरी, ताशी व्यू प्वाइंट आदि शामिल है।

गंगटोक घूमने से पहले यहां की कुछ खूबसूरत जगहों के बारे में भी एक बार जान लें, जिनकी वजह से यहां की खूबसूरती में चार चांद लगे हुए हैं। गंगतोक में घूमने लायक जगह में त्सोमगो झील, नाथुला पास, हिमालयन जूलाॅजिकल पार्क, रंका मठ, नामग्याल तिब्बत विज्ञान संस्थान, सेवन सिस्टर वाटरफाॅल्स, कंचनजंगा पर्वत, एमजी रोड, हनुमान टोक, रेशी हॉट स्प्रिंग्स, बाबा हरभजन सिंह मंदिर, गणेश टोक, त्सुक ल खंग मॉनेस्ट्री, पुष्प प्रदर्शनी केंद्र, दो द्रुल चोर्टेन, भंजकरी जलप्रपात और कवी लोंग स्टाॅक हैं।

गंगटोक कैसे पहुंचे – How to Reach Gangtok

अगर आप अपनी पर्सनल कार से गंगटोक की यात्रा के लिए जाना चाहते हैं तो आपको बता दें कि राष्ट्रीय राजमार्ग 31 ए मार्ग के माध्यम से गंगटोक जाना सबसे सुविधाजनक रहेगा। सड़क मार्ग जाने का सबसे अच्छा फायदा यह होता है कि आप जरूरत पढ़ने पर कहीं भी रुक सकते हैं। सड़क पर जाने वाले यात्रियों की मदद के लिए मार्ग के किनारे कई एटीएम ईंधन पंप और भोजन आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। गंगटोक से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुड़ी है। गंगटोक से सबसे नजदीकी हवाई अड्डा बागडोगरा हवाई अड्डा है जो गंगटोक से 124 किमी की दूरी पर स्थित है।

लद्दाख – Ladakh

लद्दाख भारत का सबसे ऊंचाई पर बसा एक केंद्र शासित प्रदेश है जिसकी राजधानी लेह है। यह 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। बाइकिंग का शौंक रखने वालों के लिए लेह लद्दाख का ट्रिप उनके लिए एक बहुत बड़ी तमन्ना होती है। बर्फीली घाटियों से ढके विशाल पहाड़, चारों तरफ हरियाली, हजारों फीट ऊंचाई वाले पर्वत और दोनों तरफ से बहते खूबसूरत झरने कुदरत की खूबसूरत कारीगरी का एक नमूना मौजूद है।

यहां की मैग्नेटिक हिल को काफी रहस्यमई माना जाता है। लेह लदाख देश ही नहीं बल्कि विदेशों से आने वाले पर्यटकों का भी एक पसंदीदा जगह है। लद्दाख में देखने लायक जगह में खारदुंग पास, कारगिल, शांति स्तूप, पैंगोंग झील, हंडर, मैग्नेटिक हिल, पैंगोंग झील की जुड़वा त्सो मोरीरी, त्सो कर झील, डिस्किट मॉनेस्ट्री, चादर ट्रैक, लेह पैलेस, गुरुद्वारा पथर साहिब, हेमिस मठ, रिवर राफ्टिंग, माउंटेन बाइकिंग और तुरतुक गांव हैं।

लद्दाख कैसे पहुंचे – How to Reach Ladakh

हिमाचल प्रदेश टूरिज्म और जम्मू और कश्मीर स्टेट टूरिज्म की तरफ से डीलक्स और सेमी डीलक्स बस की सुविधा उपलब्ध है। जो मनाली से लेह और श्रीनगर से लेह की और बस की सुविधा उपलब्ध कराती है। लद्दाख से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन जम्मू रेलवे स्टेशन है। लद्दाख से सबसे नजदीकी हवाई अड्डा लेह हवाई अड्डा है।

नैनीताल – Nainital

अगर आप मई महीने किसी पहाड़ी क्षेत्र में घूमने की योजना बना रहे हैं लेकिन स्विट्जरलैंड नहीं जाना चाहते तो आप अपने देश में ही स्विट्जरलैंड की तरह ही पहाड़ व झीलों का आनंद उठा सकते हैं। भारत में ही एक शहर है जिससे आप छोटा स्विट्ज़रलैंड तो कह ही सकते हैं। हम बात कर रहे हैं नैनीताल शहर की। नैनीताल भारत के उत्तराखंड राज्य का एक जिला वह शहर है। नैनीताल एक पहाड़ों व झीलों का शहर है इसलिए यह भारत के मुख्य पर्यटन स्थलों में से भी एक है।

समुद्र तल से 1938 मीटर ऊपर बसा यह सुंदर नगर 19वी शताबादी में अंग्रेजों द्वारा अपने फुर्सत के पलों को बिताने के लिए बसाया गया था। यह खूबसूरत शहर अपनी हरी-भरी वादियों व शांत वातावरण के लिए हमेशा पर्यटकों का चहेता बना रहता है। नैनीताल में घूमने लायक जगह में नैनी झील, माल रोड, नैना देवी मंदिर, ईको गुफा पार्क, स्नो व्यू प्वाइंट, नैनीताल चिड़ियाघर, राजभवन नैना चोटी,टिफिन टॉप, केबल कार, पंगोट, पंडित बल्लभ पंत ज़ु, ज्योलीकोट और जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क हैं।

नैनीताल कैसे पहुंचे – How to Reach Nainital

हरिद्वार से नैनीताल की दूरी 300 किलोमीटर है, आपको यहां से नैनीताल के लिए रोडवेज बसें मिल जाती है। दिल्ली, आगरा, कानपुर, हल्द्वानी, लखनऊ देहरादून एवं बरेली आदि शहरों से भी नैनीताल के लिए रोडवेज बसें निरंतर अवगमन करती रहती है। नैनीताल से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम रेलवे स्टेशन है जो कि हल्द्वानी में है। नैनीताल का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पंतनगर है जोकि नैनीताल से लगभग 65 किमी की दूरी पर स्थित है।

माउंट आबू – Mount Abu

माउंट आबू राजस्थान का एक मात्र हिल स्टेशन है जो अपने शांत वातावरण और हरे भरे माहौल के लिए जाना जाता है। यह हिल स्टेशन राज्य का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है। माउंट आबू अरावली रेंज में ऊंचे पथरीले पठार पर मौजूद है, जो जंगलों से घिरा हुआ है। इस जगह की शांत जलवायु और मैदानों का नजारा पर्यटकों को बेहद खुश कर देता है।

यहां स्थित कई झीलें, हरे-भरे जंगल, नदियां और झरने इसे एक ठंडा स्थान बनाती हैं। अधिकांश गर्मियों में और मानसून के दौरान यहां हर साल लाखों की तादाद में पर्यटक घूमने आते हैं। माउंट आबू में घूमने लायक जगह में गोमुख मंदिर, अचलगढ़ किला,अबरूदा देवी मंदिर, दिलवाड़ा मंदिर, टोड रॉक, नक्की झील, वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, गुरु शिखर, सनसेट पॉइंट, हनीमून प्वाइंट और ब्रह्मा कुमारी पीस आश्रम हैं।

माउंट आबू कैसे पहुंचे – How to Reach Mount Abu

सड़क मार्ग द्वारा माउंट आबू के लिए देश के दूसरे शहर जैसे उदयपुर, दिल्ली, जयपुर, आगरा और जोधपुर से काफी अच्छी कनेक्टिविटी उपलब्ध है। आप खुद भी ड्राइव करके जा सकते हैं या आप चाहे तो प्राइवेट बस सेवा भी ले सकते हैं, माउंट आबू का रेलवे स्टेशन जो शहर से 28 किमी की दूरी पर स्थित है जो देश के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशन जैसे जयपुर, मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद और आगरा से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है तो आप यहां ट्रेन के जरिए बड़े आराम से पहुंच सकते हैं। माउंट आबू का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा दबोक, उदयपुर का महाराणा प्रताप हवाई अड्डा है जो माउंट आबू से 176 किमी की दूरी पर स्थित है।

लक्षद्वीप – Lakshadweep

लक्षद्वीप एक बेहद ही खूबसूरत आईलैंड है, जहां जाने का सपना हर कपल का होता है। लक्षद्वीप पर्यटन स्थल भारत का एक बहुत ही खूबसूरत केंद्र शासित प्रदेश है। भारत की मुख्य भूमि से लगभग 300 किमी की दूरी पर अरब सागर में स्थित है। लक्षद्वीप भारत का सबसे छोटा केंद्र शासित प्रदेश होने के साथ-साथ एक आकर्षित पर्यटन स्थल भी है। जिसे देखकर देशी और विदेशी पर्यटक यहां खिंचे चले आते हैं।

आप भी अपने पार्टनर के साथ लक्ष्यद्वीप जैसे खूबसूरत जगह पर जाने का प्लान जरूर बनाएं। हनीमून के लिए यह जगह बेस्ट है। यात्रा की योजना बनाने से पहले इस बात का अच्छी तरह से ध्यान रखें के यहां जाने के लिए आपको एक विशेष परमिट की आवशक्यता होती है। लक्षद्वीप में घूमने लायक जगह में अगत्ती द्वीप, मिनिकॉय द्वीप, बांगरम द्वीप, कावारत्ती द्वीप, स्कूबा डाइविंग, कल्पेनी द्वीप, वाटर स्पोर्ट, मरीन संग्रहालय, कदमत द्वीप, अमिन्दिवी द्वीप और अंद्रेती द्वीप हैं।

लक्षद्वीप कैसे पहुंचे – How to Reach Lakshadweep

लक्षद्वीप पहुंचने के लिए समुद्री जहाज से यात्रा करना भी एक अच्छा विकल्प है। कोच्चि से लक्षद्वीप के लिए कई यात्री जहाज जाते हैं। यह यात्रा 18 से 20 घंटे की है। इन जहाजों पर कई तरह की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। हालांकि, मॉनसून के दौरान जहाज सेवा बंद रहती है। इस केंद्र शासित प्रदेश में अगत्ती में हवाई अड्डा है। केरल के शहर कोच्चि से नियमत उड़ाने लक्षद्वीप जाती हैं।  अगत्ती और कोच्चि के बीच उड़ान का वक्त सिर्फ 1 घंटा 30 मिनट है। इन दीपों पर पहुंचने के लिए पवन हंस हेलीकॉप्टर सर्विस भी उपलब्ध है। अगत्ती से आप कावारत्ती और मॉनसून में बांगरम पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा ले सकते हैं।

Conclusion

हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा लेख  Best Place to Visit in May in India अच्छा लगा होगा। कृप्या करके इसे अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और परिवार वालों के साथ जरूर शेयर कीजिए। इस संदर्भ में अगर आपका कोई प्रशन या सुझाव है तो हमें कमेंट करके जरूर बताइए।

2 thoughts on “भारत में मई में घूमने की जगह | Best Tourist Places to Visit in May in India in Hindi”

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