खाटू श्याम जी मंदिर जयपुर, राजस्थान – Khatu Shyam Mandir Jaipur, Rajasthan In Hindi

दोस्तों क्या आप भी जानना चाहते हैं कि खाटू श्याम मंदिर कहां पर है खाटू श्याम मंदिर का इतिहास क्या है खाटू श्याम मंदिर में लोग इतनी दूर दूर से क्यों आते हैं| आज हम खाटू श्याम मंदिर से संबंधित आपके सवालों के जवाब देने की पूरी पूरी कोशिश करेंगे। हम आपको बताना चाहेंगे कि खाटू श्याम मंदिर भगवान श्री कृष्ण के मंदिरों में से सबसे प्रसिद्ध मंदिर है क्योंकि खाटू श्याम जी को कलयुग का सबसे मशहूर भगवान माना जाता है| 

खाटू श्याम मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में स्थित है| खाटू श्याम जी को लखदातार के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि कहा जाता है कि जो भी इंसान इस मंदिर में आकर अपनी कोई मन्नत मांगता है तो उनकी वह मन्नत हमेशा पूरी होती है| इसके अलावा हिंदू धर्म के मुताबिक खाटू श्याम जी को कलयुग में कृष्ण का अवतार माना गया है क्योंकि भगवान श्री कृष्ण ने खाटू श्याम जी को यह वरदान दिया था कि कलयुग में श्याम जी के नाम से जाने जाएंगे| यही वजह है कि आज खाटू श्याम मंदिर में करोड़ों भक्त उनके दर्शन करने आते हैं और उनकी पूजा करते हैं|

खाटू श्याम मंदिर में लोग होली से पहले फरवरी मार्च के महीने में आते हैं और कहा जाता है कि श्री खाटू श्याम मंदिर में 40 लाख भगत हर साल इन दिनों में आते हैं और इन दिनों में खाटू श्याम मंदिर में एक भव्य मेला आयोजित किया जाता है| होली के आसपास सिर्फ देश से ही नहीं विदेशों से भी भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं| यह भी बताया जाता है कि मंदिर महाभारत के समय का बना हुआ है और इस मंदिर का महाभारत के युद्ध से भी संबंध है तो आज हम आपको खाटू श्याम मंदिर जी से जुड़े हुए कुछ दिलचस्प तथ्यों के बारे में जानकारी शेयर करने जा रहे हैं तो आप हमारे इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें| 

Table of Contents

खाटूश्याम मंदिर वास्तुकला – Khatu Shyam Mandir Architecture

खाटू श्याम जी मंदिर महाभारत के समय में बनकर तैयार हो गया था और इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण जी खाटू श्याम बाबा के रूप में स्थापित किये हुए है| इस मंदिर में उनकी मूर्ति सिर के रूप में है जो कि खाटू गांव के कुंड में दबा हुआ मिला था| खाटू श्याम मंदिर मकराना और संगमरमर से निर्मित है| यहां इस मंदिर में एक प्रार्थना हाल भी है जिससे जगमोहन के नाम से जाना जाता है और इस प्रार्थना हाल की खास बात यह है कि इसकी दीवारों पर पौराणिक दृश्य बनाये हुए हैं| इसके अलावा खाटू श्याम जी के प्रवेश और निकास संगमरमर के बने हैं। जैसे ही आप प्रवेश करते हैं वहां पर आपको एक खुली जगह देखने को मिलती है और साथ ही पास में एक बाग़ भी बना हुआ है जिसे श्याम बाग के नाम से जाना जाता है और यह बाग़ पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है|

यह वही बाग है जहां से भगवान खाटू श्याम को अपर्ण करने के लिए फूल चुने जाते हैं। इसके अलावा बगीचे के बाहर अलू सिंह की समाधि भी स्थित है ओर साथ ही साथ मुख्य मंदिर के दक्षिण पूर्व में गोपीनाथ मंदिर भी स्थित है। ओर गौरीशंकर मंदिर भी यहाँ पास में ही है। 

किसने बनवाया खाटूश्याम जी का मशहूर मंदिर – Who Built Khatu Shyam Ji Temple In Hindi

खाटू श्याम जी का मंदिर सन 1027 में वहां के शासक राजा रूप सिंह चौहान और उनकी पत्नी के द्वारा बनवाया गया था| पौराणिक कथा के अनुसार माना जाता है कि एक बार राजा रूप सिंह को सपना आया था जिसमें उनको श्याम का सिर खाटू गांव के कुंड में दिखाई दिया था| जिसके बाद उन्होंने मंदिर बनवाने के बारे में सोचा और मंदिर बनवाना शुरू कर दिया और इस तरह यह मंदिर उस समय में खाटू गांव में खाटू श्याम मंदिर के नाम निर्माण करवाया गया| लेकिन फिर बाद में मशहूर दीवान अभय सिंह ने साल 1720 इस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया था| 

खाटू श्याम जी का इतिहास – Story of Khatu Shyam Temple In Hindi

श्री खाटू श्याम जी बलवान गदाधारी भीम और नागकन्या कोरवी मौरवी के पुत्र थे| उनका बचपन का नाम बर्बरीक बर्बरीक था| उन्होंने युद्ध करने की कला बचपन से ही सीख ली थी| उन्होंने युद्ध करने की कला अपनी मां और कृष्ण से सीखी थी| उन्होंने भगवान शिव की घोर तपस्या करके तीन बार प्राप्त किए थे और यह तीनो बाण तीनो लोक में विजय बनाने के लिए काफी थे। इसके अलावा जब उन्हें पता चला कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध होने जा रहा है तो उन्होंने भी खुद युद्ध में हिस्सा लेने की इच्छा जताई| वह युद्ध में जाने से पहले अपनी मां का आशीर्वाद लेने पहुंचे और उन्होंने हारे हुए पक्ष की ओर से युद्ध करने का वचन दिया था| 

ऐसे हुई भगवान् श्री कृष्ण की बर्बरीक से मुलाक़ात

जब श्री कृष्ण जी को बर्बरीक के युद्ध के वचन के बारे में पता चला तो वह ब्राह्मण का रूप धारण करके बर्बरीक का मजाक उड़ाने लगे और कहने लगे कि यह तीन बाण से युद्ध लड़ोगे| तो बर्बरीक ने इस बात का जवाब दिया कि उनका एक बाण ही उस युद्ध के लिए काफी है| अगर उन्होंने यह तीनों बाण चला दिया तो ब्रह्मांड का विनाश हो जाएगा| 

कृष्ण ‘परीक्षा’ में सफल हुए बर्बरीक

भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक पीपल की पत्तियों का निशाना बनाने की चुनौती दी और बर्बरीक ने चुनौती को स्वीकार कर लिया| भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक की परीक्षा लेने के लिए उन्होंने तीन पीपल की पत्तियां लगाइए में से एक पत्र की पत्ती को अपने पैरों के नीचे दबा लिया और निशाना लगाने के लिए कहा| बर्बरीक ने एक ही बाण से निशाना लगाने के लिए बाण छोड़ दिया तो जैसी दो पत्तियां पर निशाना लगा तो तीसरी पत्ती पर निशाना लगने के लिए भगवान श्री कृष्ण के आसपास घूमने लगी और बर्बरीक ने कहा कि आप पीपल की तीसरी पत्ती के ऊपर से पैर हटा लीजिए वरना आपके पांव पर चोट लग जाएगी।

उसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक से पूछा कि वह युद्ध किस तरफ से लड़ेगा तो बर्बरीक ने कहा कि जो पक्ष हारेगा में उसकी तरफ से युद्ध लडूंगा| जबकि भगवान श्री कृष्ण को ज्ञात था कि युद्ध में कौरवों की हार होगी और उन्होंने अगर बर्बरीक भी उनके साथ युद्ध में हिस्सा लेगा तो नाइंसाफी होगी| 

जब मांग लिया गया शीश दान

उन्होंने बर्बरीक को युद्ध से हटाने के लिए दान मांगा और दान में भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक का सिर मांगा तो बरबरी ने अपना सिर काट के भगवान श्री कृष्ण के चरणों में रख दिया और अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि मै महाभारत का युद्ध देखना चाहता हूं| तो भगवान श्री कृष्ण ने उनके इच्छा को स्वीकार कर लिया और उनके कटे हुए सिर को एक पहाड़ी के ऊपर रख दिया और उस पहाड़ी से बर्बरीक महाभारत का युद्ध अंतिम तक देखते रहे| 

बर्बरीक बने ‘निर्णायक’

युद्ध जीतने के बाद पांडव आपस में लड़ने लगे कि युद्ध में जीत का श्रेय किसको जाता है| इस पर श्री कृष्ण ने उनसे कहा कि बर्बरीक का शीश सम्पूर्ण  युद्ध का साक्षी है| इसलिए उस से बेहतर कौन बता सकता है| इस बात पर पांडव सहमत हो गए और पहाड़ी की ओर चल पड़े तो उन्होंने जब बर्बरीक से पूछा कि इस युद्ध का श्रेय किसको जाता है तो उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ही युद्ध विजय प्राप्त कराने में सबसे महान पात्र हैं| उन्हें युद्ध भूमि से सिर्फ उनका सुदर्शन चक्र ही घूमता हुआ दिखाई दे रहा था और शत्रुओं के सर काट रहा था| महाकाली, श्री कृष्ण के आदेश पर शत्रु सेना के रक्त से भरे का सेवन कर रही थी| 

श्री कृष्ण ने दिया वरदान

श्री कृष्ण बर्बरीक के इस बलिदान से प्रसन्न हो गए और उन्होंने बर्बरीक को वरदान दिया कि कलयुग में श्याम से नाम से जाने जाओगे और उन्हें श्याम के नाम से पूजा जाने का अनमोल वचन दे दिया।

बर्बरीक से कैसे पड़ा खाटू श्याम नाम – The Story Behind The Name Of Khatushyam From Barbarik In Hindi

जैसे कि हमने आपको पहले भी बताया था की खाटू श्याम जी का तालुकात महाभारत के समय से है| जब महाभारत का युद्ध खत्म हुआ तो खाटू श्याम जी के सिर को खाटू गांव में दफनाया गया था| फिर वहां काफी समय के बाद एक गाय अपने स्तनों के साथ दूध अर्पण कर रही थी तो लोगों को देखकर आश्चर्य हुआ| जब उन्होंने उस जगह को खोदा तो उन्हें वहां से खाटू श्याम जी का कटा हुआ सिर मिला| उन लोगों ने उसका कटे हुए सिर को एक ब्राह्मण को सौंप दिया| फिर ब्राह्मण ने उस सिर की रोजाना पूजा करनी शुरू कर दी| 

उस समय के दौरान उस समय के राजा रूप सिंह को एक बार सपना आया जिसमें उन्हें खाटू श्याम जी का मंदिर का निर्माण करने के बारे में बताया गया तो उसके बाद राजा रूप सिंह ने एक मंदिर बनवाया जिसमें खाटू श्याम जी के कटे हुए सर को सुशोभित कर दिया| यह उन्होंने कार्तिक महीने की एकादशी को बर्बरीक के शीश को मंदिर में सुशोभित कर दिया| जिसे बाबा खाटू श्याम जी के नाम से जाना जाता है और उसके बाद यह मंदिर प्रसिद्ध हो गया| 

खाटू श्याम जी के दर्शन और आरती का समय – Darshan And Arti Timings Of Khatushyam Ji Temple In Hindi

अगर आप खाटू श्याम जी मंदिर में दर्शन के लिए जाना चाहते हैं तो मंदिर में दर्शन करने के लिए समय निर्धारित किया हुआ है| ऐसा में गर्मियों और सर्दियों दोनों में अलग-अलग समय निर्धारित किया हुआ है| 

गर्मियों में खाटू श्याम मंदिर में दर्शन करने का समय

अगर आप खाटू श्याम जी के मंदिर में दर्शन करना चाहते हैं और आप ने अगर गर्मियों में खाटू श्याम के मंदिर में जाने के बारे में सोचा है तो गर्मियों में खाटू श्याम जी मंदिर में दर्शन करने का समय 4:30 से 12:30 तक का होता है और शाम को 5:00 से 9:00 तक का होता है| गर्मियों में मंगल आरती सुबह 4:45 पर होती है| गर्मियों में खाटू श्याम जी के सिंगार का समय सुबह 7:00 का होता है और आरती का समय 12:15 पर होता है| संध्या की आरती गर्मियों में शाम को 7:30 बजे होती है| इसके अलावा पट बंद होने के दौरान होने वाली आरती रात को 10:00 बजे होती है

सर्दियों में खाटू श्याम मंदिर में दर्शन करने का समय

अगर आप खाटू श्याम जी मंदिर में सर्दियों में जाना चाहते हैं तो सर्दियों का समय गर्मियों के समय से बिलकुल अलग होता है| खाटू श्याम मंदिर में सर्दियों में दर्शन करने का समय सुबह 5:30 से लेकर 1 बजे तक होता है और शाम को दर्शन करने का समय 5:00 बजे से लेकर रात के 9:00 बजे तक होता है| वहीं अगर मंगल आरती की बात करें तो सर्दियों में मंगल आरती का समय सुबह 5:45 पर होता है| तो सर्दियों में खाटू श्याम जी के सिंगार का समय सुबह 8:00 बजे होता है और सर्दी में आरती के समय 12:30 पर होता है| सर्दियों में संध्या की आरती शाम को 6:00 बजे होती है| इसके अलावा पट बंद होने के दौरान होने वाली आरती रात को 9:00 बजे होती है| 

Tips For Visiting Khatu Shyam Mandir

  • मंदिर में दर्शन करने के लिए प्रसाद, फूलमाला, नारियल और ध्वज का लेकर जाना मना है| 
  • दर्शन करने के लिए सभी भक्तों के लिए पंजीकरण कराना जरूरी है। 
  • भक्तों को अपने चप्पल, जूते अपनी गाड़ी या रुकने वाले स्थान पर ही छोड़ कर जाना चाहिए। 
  • मंदिर में दर्शन करने के बाद परिसर में रुकना सख्त मना है। 
  • भक्तों के लिए बने हुए नियमों का पालन करके ही आप बाबा श्याम के दर्शन कर सकते हैं| 

खाटू श्याम पूजा विधि के नियम

बाबा खाटू श्याम जी की पूजा हर महीने की द्वादश को की जाती है और कहा जाता है कि जो इंसान इस दिन बाबा खाटू श्याम की पूजा करता है वह भगवान श्री कृष्ण की पूजा करता है और जो व्यक्ति भगवान श्री कृष्ण की पूजा करता है वह भवसागर से पार होता है| यह भी मान्यता है कि अगर कोई इंसान लगातार पांच द्वादश को व्रत रखकर उनकी सच्ची भक्ति से पूजा करता है तो उनके सारे बिगड़े हुए काम पूरे हो जाते हैं। 

पूजा की सामग्री:

  • बिना टुटा हुआ एक मुट्ठी चाबल
  • देशी घी का दीपक
  • खीर
  • चूरमा का लड्डू
  • एक मीठा पान
  • रोली
  • अक्षत

खाटू श्याम का मेला कब लगता है – Khatu Shyam Ka Mela Kab Lagta Hai In Hindi

खाटू श्याम जी का मेला होली से पहले फरवरी-मार्च के महीने में लगता है| यह मेला 5 दिनों तक चलता है यानी 8वें से 12वें दिन या अष्टमी से द्वादशी तक मनाया जाता है| भक्तों और तीर्थयात्रियों के अलावा इस मेले में कई संगीतकार बाबा श्याम के भजन और आरती गाने के लिए मंदिर जाते हैं।इस मेले में लोग देश और विदेश दोनों जगह से आते हैं और होली का त्यौहार खाटू श्याम जी के साथ मनाते हैं| यह मेला खाटू गांव में लगता है| 

खाटू श्याम जी के श्यामकुंड में नहाने का महत्व – Importance Of Bathing In ShyamKund Near Khatu Shyam Ji Mandir In Hindi

खाटू श्याम मंदिर के पास एक तालाब है और इस तालाब का नाम श्याम कुंड है| इस तालाब में नहाने से मनुष्य की बीमारियां खत्म हो जाती हैं और वह स्वस्थ हो जाता है| यह भी माना जाता है कि वह खासतौर से वार्षिक फाल्गुन मेले में इस तालाब में डुबकी लगाने की खास मान्यता है| 

खाटू श्याम जी सीकर मंदिर कैसे जाएं – How To Reach Khatu Shyam Ji Mandir In Hindi

खाटू श्याम जी पवित्र मंदिर में जाने के लिए आपको जयपुर से जाना पड़ेगा| खाटू श्याम जी मंदिर खाटू गांव में स्थित है और यह मंदिर जयपुर से 80 किलोमीटर की दूरी पर है| खाटू गांव के सबसे पास रिंगस रेलवे स्टेशन है और इसकी मंदिर से दूरी 18 किलोमीटर है| चाहे तो आप जीप या टैक्सी किराए पर ले सकते हैं और चाहे तो जीप या टैक्सी शेयरिंग भी कर सकते हैं| इसके अलावा अगर आप फ्लाइट के जरिए खाटू श्याम की गांव जाना चाहते हैं तो आपको फ्लाइट यपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक की लेनी पड़ेगी| यहाँ से खाटू श्याम की दूरी 95 किलोमीटर है| अगर आप बाय रोड दिल्ली से खाटू श्याम मंदिर के लिए रवाना होते हैं तो आपको 4.30 से 5 घंटे का समय लगेगा| 

Hotel Near Khatu Shyam Mandir Jaipur 

अगर आप खाटू श्याम जी मंदिर जयपुर दर्शन करने के लिए जा रहे हैं और आपको समझ नहीं आ रहा कि आप वहां जाकर कौन सा Hotel Book करना हैं| वैसे तो आप वहां जाकर अपनी मर्जी से कोई भी होटल मैं जाकर Stay  कर सकते हैं परंतु फिर भी आपके लिए हम कुछ फेमस होटल की जानकारी यहां शेयर करने जा रहे हैं:-

Conslusion

दोस्तों अब आप जान चुके होंगे कि खाटू श्याम मंदिर जयपुर राजस्थान क्यों और कैसे बनवाया गया| खाटू श्याम मंदिर का इतिहास क्या है खाटू श्याम मंदिर जाने का रास्ता क्या है| खाटू श्याम मंदिर के आस पास रहने के लिए होटल कौन से हैं। उम्मीद करते हैं कि जब भी आप बाबा खाटू श्याम जी मंदिर जयपुर राजस्थान में दर्शन के लिए जाएं तो हमारी यह जानकारी आपके लिए लाभदायक सिद्ध होगी| अगर आपको हमारे द्वारा शेयर करी गई जानकारी से संबंधित कोई भी डाउट है तो आप हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं|

 

 

FAQ (Frequently Asked Questions)

खाटू श्याम जी किसका रूप है?

खाटू श्याम जी भगवान श्री कृष्ण का रूप है।

खाटू श्याम का मेला कब लगता है? 

खाटू श्याम का मेला होली से पहले फरवरी-मार्च के महीने में लगता है| यह मेला 5 दिनों तक चलता है यानी 8वें से 12वें दिन या अष्टमी से द्वादशी तक मनाया जाता है| 

खाटू श्याम बाबा का जन्म कब हुआ था?

खाटू श्याम बाबा का जन्म महाभारत के समय में हुआ था।

खाटू श्याम जी का मशहूर मंदिर किसने बनवाया था?

खाटू श्याम जी का मशहूर मंदिर उस समय के राजा रूपसिंह चौहान और उनकी पत्नी नर्मदा कंवर ने बनाया था। उन्होंने यह मंदिर 1027 में में बनाया था| 

खाटू श्याम कौन से जिले में स्थित है?

खाटू श्याम जी का मंदिर राजस्थान में जयपुर के सीकर जिले के खाटू गांव में स्थित है।

खाटू श्याम का महत्व?

खाटू श्याम जी के पवित्र कुंड में नहाने से इंसान के शरीर से बीमारिया ख़तम हो जाती है और वह स्वस्थ हो जाता है|

खाटू श्याम जी के माता पिता का नाम क्या था?

खाटू श्याम जी के पिता बलवान गदाधारी भीम थे और माता नाग कन्या मोरवी थी।

खाटू श्याम कब जाना चाहिए?

खाटू श्याम जाने का Best समय अक्टूबर से मार्च तक होता है| 

 

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