NAT क्या है | What is NAT in Hindi | NAT Full Form क्या है?

दोस्तों क्या आप भी जानना चाहते हैं कि NAT क्या है? व्हाट इज नॉट इन हिंदी| आज के इस पोस्ट में हम आपको NAT के बारे में पूरी जानकारी देने जा रहे हैं जैसे कि NAT कितने प्रकार का होता है? NAT के Advantages क्या है और NAT की working कैसे होती है? अगर आप भी इन सब के बारे में जानकारी लेना चाहते हैं तो हमारे इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें।

NAT का फुल फॉर्म क्या है? (Full Form of NAT)

NAT का फुल फॉर्म Network Address Translation है|

NAT क्या है – What is NAT in Hindi

NAT एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें Network Device, Private Network या एक से अधिक कंप्यूटर को एक IP Address प्रदान किया जाता है| हम यह भी कह सकते हैं कि NAT एक ऐसा method है जिसके जरिए हम Local IP Address को Global IP Address में translate कर सकते हैं| यानी कि हम एक या एक से अधिक लोकल आईपी एड्रेस को एक या एक से अधिक ग्लोबल आईपी एड्रेस में ट्रांसलेट कर सकते हैं।

जैसे हम जानते हैं कि आज के समय में इंटरनेट का इस्तेमाल बहुत ज्यादा हो रहा है और किसी भी सिस्टम को इंटरनेट के साथ जोड़ने के लिए IP Address की जरूरत पड़ती है| हम आपको एक बात बताना चाहेंगे कि आज के समय में ipv4 का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है ताकि एक या एक से अधिक कंप्यूटर को इंटरनेट के साथ जोड़ा जा सके| परंतु ipv4 का इस्तेमाल बहुत ज्यादा होने की वजह से ipv4 address में बहुत ज्यादा कमी आ रही है| 

इसलिए इस समस्या का समाधान निकालने के लिए ipv6 को develop किया जा रहा है| परंतु उसके implement में भी काफी ज्यादा समय लगेगा। ऐसी स्थिति में कंप्यूटर को इंटरनेट के साथ जोड़ने के लिए NAT का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि IP Address की आवश्यकता को पूरा किया जा सके।

नेट को CISCO के द्वारा विकसित किया गया है और CISCO एक ऐसा mechanism है| जो private network और internet के बीच में काम करता है|  NAT को IETF RFC 1631 में define किया गया है|

मन लीजिये अगर आप कोई कंपनी चला रहे हैं और आपकी कंपनी में 10 सिस्टम है जिसको आप इंटरनेट के साथ जोड़ना चाहते हैं तो उस समय आपको 10 IP address की जरूरत पड़ती है| ताकि आप उन सिस्टम पर इंटरनेट को चला सके| परंतु वही अगर आप NAT का इस्तेमाल करते हैं तो आपको 10 आईपी एड्रेस की जरूरत नहीं पड़ती है क्योंकि NAT की मदद से आप अपने 10 सिस्टम को एक ही Global IP address से इंटरनेट के साथ जोड़ सकते हैं| इस तरह NAT किसी भी ऑर्गेनाइजेशन या कंपनी में  IP address की जरूरत को कम कर देता है।

Types of NAT in Hindi – NAT के प्रकार

  • Static NAT
  • Dynamic NAT
  • PAT (Port Address Translation)

Static NAT

Static NAT को One to One mapping कहा जाता है क्योंकि इसमें सिर्फ एक local IP की एक global IP address में मैपिंग की जाती है| Static NAT का इस्तेमाल web hosting में किया जाता है। यही वजह है कि इसका इस्तेमाल किसी कंपनियां ऑर्गेनाइजेशन में नहीं किया जाता है क्योंकि वहां पर एक से ज्यादा सिस्टम का इस्तेमाल होता है और उनके लिए अलग IP address की जरूरत पड़ती है।

Dynamic NAT

Dynamic NAT का इस्तेमाल निश्चित users को इंटरनेट के साथ जोड़ने के लिए किया जाता है| बहुत सारे Local IP address को Pool के जरिए global IP address में map किया जाता है| यह तब किया जाता है जब आपको मालूम होता है कि कितने समय के लिए कितने users ने इंटरनेट का access करना है।

PAT (Port Address Translation)

PAT को NAT Overload भी कहा जाता है क्योंकि इसके जरिए एक global IP address में हजारों डिवाइसों को इंटरनेट से कनेक्ट किया जाता है। PAT का इस्तेमाल करके बहुत सारें local IP address को केवल एक global IP address में map करके इन डिवाइस इसका इस्तेमाल किया जाता है।

NAT कैसे कार्य करता है (How NAT Works in Hindi)

मान लीजिये आपके पास एक router है जिस में आपने दो computer और एक mobile को जुड़ा हुआ है| इसमें आप अपने computer को आपस में cable के जरिए connect करते हैं और उसमें private IP address configure किया जाता है। अगर आप अपने दोनों कंप्यूटर और मोबाइल को इंटरनेट से जोड़ते हैं तो उस समय आपके मोबाइल और कंप्यूटर को एक ही public IP address की आवश्यकता होती है l

अगर आपके Router में NAT Configure है और आप किसी web page को access करना चाहते हैं तो उस स्थिति में आपके कंप्यूटर के द्वारा router को एक data packet भेजा जाता है। फिर router आपके कंप्यूटर के private IP address को public IP address में change कर देता है| ताकि उस outgoing IP address के request को पूरा किया जा सके। क्योंकि इंटरनेट पर आपके उस कंप्यूटर को आपके उस public IP address के द्वारा पहचाना जा सके| यह इसलिए change करा जाता है क्योंकि web server के पास आपके नेटवर्क में इस्तेमाल हो रहे private IP address की जानकारी नहीं होती है। 

फिर जब आपके द्वारा की गई request पूरी हो जाती है तो जानकारी आपके public IP address को वापस भेज दी जाती है तो उस समय यह जानकारी आपके कंप्यूटर को Router के public IP address के द्वारा दी जाती है। इस तरह आसान शब्दों में हम कह सकते हैं कि NAT का उपयोग करके Router public IP address को private IP address में बदलकर request की जानकारी आपके कंप्यूटर तक पहुंचाता है।

NAT के फायदे क्या है? (Advantages of NAT in Hindi)

  • इसका इस्तेमाल करने से हम ipv4 address की कमी को दूर कर सकते हैं। 
  • इसके द्वारा लोकल आईपी ऐड्रेस का दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। 
  • NAT का इस्तेमाल करके सिर्फ एक आईपी ऐड्रेस बहुत सारे डिवाइस को प्रदान किया जा सकता है| 
  • यह बहुत ही flexible और reliable होता है| 
  • इसमें सावर source और destination आईपी ऐड्रेस को secret रखा जाता है जो कि प्राइवेट नेटवर्क को सुरक्षा प्रदान करता है।

NAT के नुक्सान क्या है? (Disadvantages of NAT in Hindi)

  • NAT बहुत ज्यादा slow है क्योंकि यह डाटा packet  को two time चेक करता है जिसकी वजह से काफी समय भी बर्बाद होता है।
  • इसका इस्तेमाल करने से बहुत ज्यादा memory और processor की आवश्यकता होती है। 
  • यह tunneling protocols जैसे कि IPsec को complicated बना देता है। 
  • जब NAT का इस्तेमाल किया जाता है तो उस समय यह कुछ नेटवर्क एप्लीकेशन को इस्तेमाल नहीं करने देता है। 
  • NAT का इस्तेमाल करने से remote areas से नेटवर्क को troubleshoot करना बहुत ज्यादा मुश्किल होता है।

NAT अंदर और बाहर के Address

Inside Local

यह आपके private network मे इस्तेमाल किया जाता है| यह एक तरह का लोकल आईपी एड्रेस होता है जो कि private network में किसी host पर configured किया होता है| इसे प्राइवेट आईपी एड्रेस भी कहा जाता है।

Inside Global

यह एक ग्लोबल आईपी ऐड्रेस होता है जो कि आपके प्राइवेट host को पब्लिक नेटवर्क यानी कि इंटरनेट में present करता है।

Outside Global

यह किसी outside host को assign किया गया global IP address होता है।

Outside Local

यह किसी प्राइवेट नेटवर्क में host को assign किया गया local IP address होता है और यह किसी public नेटवर्क में global IP address भी हो सकता है।

जब भी हम अपने घर पर इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं तो उस समय कोई भी host इंटरनेट से जब connect होने का प्रयास करता है तो NAT उसे एक ग्लोबल आईपी एड्रेस में ट्रांसलेट कर देता है और इस प्रकार वह आसानी से इंटरनेट को access कर लेता है।

Troubleshooting NAT in Hindi – NAT को troubleshoot करना

अगर आप भी NAT को troubleshoot करना चाहते हैं तो उसके लिए कुछ commands की जरूरत पड़ती है और उन commands के बारे में हम आपको नीचे बताने जा रहे हैं।

Static or dynamic net translation को देखने के लिए इस कमांड का को execute किया जाता है।

Router# show ip nat translation

अगर आप देखना चाहते हैं कि आपका कौन सा interface inside है और कौन सा interface outside है तो इस command को execute कर सकते हैं।

Router# show ip nat statistics

अगर आप NAT Translation को real time में देखना चाहते हैं तो आप इस command को execute कर सकते हैं।

Router# debug ip nat

अगर आप Dynamic NAT पर काम कर रहे हैं और डायनामिक नेट एंड इसको क्लियर करना चाहते हैं तो आप नीचे बताई हुई command को execute कर सकते हैं।

Router# clear ip nat translation

Conclusion

दोस्तों अब आप जान चुके हैं कि NAT क्या है, NAT कितने प्रकार का होता है, NAT का फुल फॉर्म क्या है, NAT full form in hindi. NAT कैसे कार्य करता है। उम्मीद करते हैं कि हमारे द्वारा शेयर करी गई जानकारी से आपके NAT के सम्बंधित जितने भी सवाल थे उसके जवाब मिल गए होंगे। अगर आपको हमारे द्वारा शेयर करी गई जानकारी से संबंधित कोई डाउट हो या फिर आप कोई राय देना चाहते हैं तो आप हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं।

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NAT का मतलब Network Address Translation होता है| इसका इस्तेमाल किसी कंपनी या ऑर्गेनाइजेशन के द्वारा किया जाता है क्योंकि NAT के जरिए हम एक से अधिक डिवाइस को एक ही आईपी एड्रेस का इस्तेमाल करके इंटरनेट के साथ कनेक्ट कर सकते हैं। आसान शब्दों में हम कह सकते हैं कि Private IP Address को Public IP Address में मैप करने का यह एक तरीका है।

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